
रायपुर। इस्लाम के आखिरी नबी की 18वीं पीढ़ी की संतान माने जाने वाले मुस्लिम धर्मगुरु सैयदी हाशिमुद्दीन अल गिलानी अल बगदादी के बस्तर दौरे को लेकर प्रदेश में राजनीति गरमा गई है। राज्य सरकार ने उन्हें राजकीय अतिथि का दर्जा दिया है। इसे लेकर कांग्रेस और भाजपा नेता भिड़ गए हैं। भाजपा ने राजकीय अतिथि का दर्जा दिए जाने पर प्रश्न खड़ा किया है। इस पर कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के कार्यकाल में विभिन्न् धर्मगुरुओं को राजकीय अतिथि बनाने के पत्रों को सार्वजनिक करते हुए पलटवार किया है।
भाजपा के पूर्व विधायक देवजी पटेल ने सरकार के आदेश के साथ ट्वीट किया- इस्लामी देश से आए धर्मगुरु अब छत्तीसगढ़ के राजकीय मेहमान बने! संतों को घसीटेंगे, गाली देंगे और धर्म विशेष के विदेशियों को राजकीय मेहमान बनाएंगे। कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह ने पलटवार करते हुए ट्वीट किया है- कुछ भक्त भूपेश सरकार द्वारा एक मुस्लिम धर्मगुरु को राजकीय अतिथि का दर्जा देने वाला पत्र वायरल कर रहे हैं। उन्हीं के लिए रमन सरकार के समय चार पत्र जारी कर रहा हूं, जिनमें मुस्लिम धर्मगुरुओं को राजकीय अतिथि का दर्जा दिया गया था। करारा जवाब मिलेगा। इससे पहले भाजपा नेता निश्चय वाजपेयी ने मुस्लिम धर्मगुरु के बस्तर प्रवास पर भी संदेह जताया। वाजपेयी ने ट्वीट किया है- नक्सली हिंसा के चलते जिस बस्तर में दूसरे प्रदेश के लोग जाने से घबराते हैं, वहां दूसरे देश के मुस्लिम धर्मगुरु का राज्य अतिथि बनकर दौरा करना बहुत अटपटा और रहस्यमयी लग रहा है।
कांग्रेस ने इन पत्रों को किया सार्वजनिक
कांग्रेस प्रवक्ता सिंह ने पूर्ववर्ती सरकार का एक अक्टूबर 2011 को जारी पत्र सार्वजनिक किया। इसमें भारत में आथोडाक्स चर्च के प्रमुख बेसिलियोस मास्थोमा पौलोस-दो को राज्य अतिथि का दर्जा दिया गया है। दूसरा पत्र फरवरी 2014 का है, जिसमें मुस्लिम धर्मगुरु हजरत हाशमी मियां अशरफी जिलानी को राज्य अतिथि बनाया गया था। तीसरा पत्र दिसंबर 2011 का है, जिसके जरिए अजमेर शरीफ दरगाह के गद्दीनशीन जैनुल आबेदीन को राजकीय अतिथि बनाया गया था। वहीं, मई 2010 में जारी चौथे पत्र से अल्लामा हाशमी अशरफी जिलानी को राजकीय अतिथि का दर्जा देने की बात थी।