
इस कार्रवाई का तेल माफिया पर कोई असर नहीं पड़ा है। चर्चा है कि, ये आरोपी खाद्य विभाग के रिटायर्ड अफसर के ही सरंक्षण में कारोबार कर रहे हैं। खाद्य अफसर ने इन आरोपियों की मुलाकात राजनेताओं से भी करवा दी है। रायपुर पुलिस की कार्रवाई के बाद भी खुलेआम पेट्रोल-डीजल-एथेनॉल ऑयल देने का वादा सिंडिकेट के सदस्य कर रहे हैं।
कैसे होता है खेल?
रायपुर जिले का मंदिर हसौद थाना क्षेत्र तेल माफिया का गढ़ है। इस इलाके में उमरिया, राजीव नगर, गुजरा, और थाना से 20 कदम की दूरी पर ऑयल टैंकरों से तेल निकालने का खेल चलता है। पुलिस ने 20 अप्रैल को यहां दबिश दी।
पुलिस की कार्रवाई के बाद दैनिक भास्कर की टीम ने इलाके का मुआयना किया। जांच की तो पता चला, कि अभी भी तेल बेचने का खेल चल रहा है। सिंडिकेट के सदस्यों द्वारा 90 रुपए प्रति लीटर दर पर पेट्रोल मुहैय्या करवाया जा रहा है।
स्थानीय लोगों की मदद से दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने तेल बेचने वाले का नंबर पता किया और उससे बात की। रिपोर्टर ने बात की, तो वो जरीकेन लाने पर तेल देने के लिए भी तैयार हो गया। रिपोर्टर ने कार्रवाई पर सवाल पूछा, तो सब सेटिंग है बोलकर सिंडिकेट के सदस्य ने दूसरा नंबर देने के लिए कहा और फोन काट दिया।
संचालनालय के आदेश का दो साल बाद भी पालन नहीं
मंदिर हसौद इलाके में तेल कटिंग की शिकायत टैंकर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने की थी। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, संचालनालय में इसकी जांच हुई। खाद्य संचालक ने टीम का गठन कर तेल चोरी करने वाले आरोपियों को पकड़ा भी था।
इस मामले में संचालनालय ने जिला प्रशासन और खाद्य विभाग के अधिकारियों को FIR कराने का निर्देश दिया। तब से दोषियों के खिलाफ जांच अभी भी ठंडे बस्ते में है। तेल सिंडिकेट पर सख्त कार्रवाई करने के लिए एसोसिएशन के पदाधिकारी अब एंटी क्राइम एंड साइबर क्राइम (एसीसीयू) से कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं।
सिंडिकेट में कौन-कौन शामिल?
सिंडिकेट में रिटायर्ड फूड अफसर के अलावा, वर्तमान में पदस्थ कुछ अधिकारी, राजनेता, पुलिसकर्मी, टैंकर मालिक, टैंकर ड्राइवर शामिल हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार जिले के अधिकारी पूरे मामले में गोपनीय जांच भी करवा रहे है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार मंदिर हसौद इलाके में तेल चोरी के खेल में 100 से ज्यादा लोग जुड़े हैं। ये लोग इलाके में सक्रिय तेल तस्करों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इस तरह होता है काम…
- तेल टैंकर के ड्राइवर को तेल देने के लिए लाइन अप करना।
- टैंकर डिपो से निकलने के बाद ठिकाने तक पहुंचाना।
- ठिकाने की चौकीदारी करना और चुराए गए तेल को खपाना।
ढाबा और पंचर दुकान की आड़ में तेल चोरी का खेल
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, तेल माफिया द्वारा पूरा कारोबार ढाबा और पंचर दुकान की आड़ में किया जाता है। इन ठिकानों में खाना खाने और गाड़ी जांच कराने के नाम पर ट्रक ड्राइवर अपनी गाड़ी रोकते हैं। गाड़ी रोकते ही पाइप की मदद से तेल निकाला लिया जाता है और ठिकाने लगा दिया जाता है। इसके बाद सिंडिकेट के सदस्य 80 रुपए में तेल खरीदते हैं और उसे 90 रुपए में बेचते हैं।
इन इलाकों में खपाते हैं पेट्रोल-डीजल-एथेनॉल
- मंदिर हसौद
- आरंग
- महासमुंद
- रायपुर
- अभनपुर
लगातार कार्रवाई जारी है- खाद्य नियंत्रक
खाद्य नियंत्रक ने पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई करने और आरोपियों से 22.50 लाख रुपए का ऑयल जब्त करने की बात स्वीकारी है। दो साल पहले हुई कार्रवाई पर खाद्य नियंत्रक ने कहा, कि मामला मेरे कार्यकाल से पहले का है, इसको देखने के बाद ही कुछ बोल पाऊंगा। मंदिर हसाैद इलाके में अभी भी तेल माफिया सक्रिय है, इस सवाल पर खाद्य नियंत्रक ने दोबारा कार्रवाई करने की बात कही।