सर्व आदिवासी समाज ने मंत्री कवासी लखमा को प्रचार करने से रोका, आरक्षण में कटौती पर की नारेबाजी

Chhattisgarh Crimes
कांकेर। भानुप्रतापपुर विधानसभा उपचुनाव में आरक्षण में कटौती को लेकर सर्व आदिवासी समाज की नाराजगी एक बार फिर सामने आ गई। दरअसल, छत्‍तीसगढ़ सरकार में आबकारी मंत्री कवासी लखमा बुधवार को कांग्रेस उम्‍मीदवार सावित्री मंडावी के लिए प्रचार करने भानुप्रतापपुर के एक गांव गए हुए थे, जहां सर्व आदिवासी समाज के लोगों ने मंत्री को प्रचार करने से रोक दिया। नाराज आदिवासियों ने मंत्री कवासी लखमा के खिलाफ नारेबाजी भी की। इस दौरान समाज के लोगों की मंत्री लखमा के बीच बहस भी हुई। मालूम हो कि छत्‍तीसगढ़ में आदिवासियों का आरक्षण 12 प्रतिशत कम होने से आदिवासी संगठन नाराज हैं।

आदिवासियों के आरक्षण में कटौती का विरोध करने के लिए आदिवासी समाज ने विधानसभा क्षेत्र की सभी 85 पंचायतों से एक-एक प्रत्याशी को मैदान में उतारने की योजना बनाई थी। 42 पंचायतों से एक एक अभ्यर्थी ने नामांकन पत्र भी खरीदा था। हालांकि सभी ने नामांकन दाखिल नहीं किया।

समाज के प्रतिनिधियों में 15 का नामांकन सही दस्तावेजों के साथ जमा नहीं करने के खारिज हो गया। नामांकन पत्र की जांच के बाद 21 प्रत्याशी मैदान में थे, लेकिन आखिरी समय में कांग्रेस के रणनीतिकारों ने आदिवासी समाज के 11 सदस्यों को अपने पाले में कर लिया। अन्य ने मैदान छोड़ दिया। अब मैदान में सिर्फ सात प्रत्याशी है। मुख्य मुकाबला कांग्रेस की सावित्री मंडावी व भाजपा के ब्रम्हानंद नेताम के बीच ही बचा है। आदिवासी समाज के बैनर पर अब एक ही प्रत्याशी पूर्व आइपीएस अकबर राम कोर्रार चुनाव मैदान में हैं। सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारी उन्हें ही वोट देने की शपथ दिला रहे हैं।

आरक्षण बहाली की मांग को लेकर धरने पर बैठे भाजपा नेता साय

छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज के आरक्षण में कटौती के विरोध में भाजपा नेता नंदकुमार साय धरने पर बैठ गए हैं। देवेंद्र नगर के नमस्ते चौक के सामने साय ने एक पंडाल लगाया और धरना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की नाकामी की वजह से समूचे प्रदेश के आदिवासियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार भाजपा पर आरोप लगा रही है, लेकिन सच यही है कि सरकार ने ठीक ढंग से कोर्ट में आदिवासियों का पक्ष नहीं रखा। सरकार विशेष सत्र की बात करती है, लेकिन हमें यकीन है कि विशेष सत्र में भी आदिवासियों के हक की बात नहीं की जाएगी। हम सरकार को चेतावनी देते हैं कि जल्द ही आदिवासियों के आरक्षण पर कोई ठोस कदम उठाया जाए, नहीं तो आने वाले दिनों में सड़क पर उतरकर और उग्र आंदोलन किया जाएगा।

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