
रायपुर में कांग्रेस नेता जी नागेश और ठेकेदार कमलेश नाहटा के घर टीम ने सुबह दबिश दी थी। देवेंद्र नगर में कांग्रेसी पार्षद उम्मीदवार श्रीनिवास राव के घर पहुंची। श्रीनिवास के साथ उनके भाई जी नागेश रहते हैं। नागेश कवासी के करीबी माने जाते हैं। वहीं इस शराब घोटाले में EOW को आबकारी विभाग के 30 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति मिल गई है।
कांग्रेस नेता ने बताया छापे के दौरान क्या हुआ
जी नागेश के भाई जी श्रीनिवास राव ने बताया कि सुबह करीब 5:45 बजे टीम घर पहुंची थी। छोटे भाई ने घर का दरवाजा खोला। EOW के अधिकारियों ने बताया कि नागेश के नाम पर सर्च वारंट है। हमने अधिकारियों को घर में सम्मान से बैठाया।
श्रीनिवास ने कहा कि हम कहीं से गलत नहीं है, इसलिए हमें किसी बात का डर नहीं है। EOW के अधिकारियों को हमने जांच में पूरा सहयोग किया ।
जी श्रीनिवास राव ने बताया कि अधिकारियों ने कहा कि आप कवास लखमा के करीबी हैं, इसलिए हमें लग रहा है कि आबकारी मामले में आपकी संलिप्तता है? लेकिन हमने उन्हें जानकारी दी है कि उनसे हमारा व्यापारिक संबंध नहीं है। लेकिन पूर्व मंत्री लखमा से हमारा व्यक्तिगत और राजनीतिक संबंध है।
प्रॉपर्टी के पेपर ले गई टीम
कांग्रेस नेता श्रीनिवास राव ने बताया कि EOW के अधिकारियों ने जांच के दौरान हमसे कहा कि 2019-2023 के बीच में आपने जो रजिस्ट्री की होगी उसकी जानकारी दीजिए। हमारा जमीन खरीदी बिक्री का भी काम है। कुछ साल पहले हमने अपनी पुरानी जमीन बेचकर नई जमीन ली है और घर की प्रॉपर्टी के जो पेपर है। उसे हमने टीम को दिया है।
फैमिली के सभी लोगों के मोबाइल को अलग रखा गया
श्रीनिवास ने बताया कि छापे के दौरान टीम ने पूछा कि घर में किसी को कोई मेडिकल प्रॉब्लम तो नहीं है, अगर है तो आप दवाई ले लीजिए या इमरजेंसी जैसी स्थिति हो तो बताए। घर के सभी मेंबर के मोबाइल को अलग रखवाया गया।
जी श्रीनिवास राव ने कहा कि कार्रवाई के दौरान हमने टीम का सहयोग किया। हम गलत नहीं है तो हमें किसी बात का डर नहीं है। कवासी लखमा के पैसों को इन्वेस्ट करने के सवाल पर श्रीनिवास ने कहा कि सांच को आंच नहीं। ये सारी बातें हवा हवाई है। हम गलत नहीं है, इसलिए हमें डर नहीं है।
अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति
शराब घोटाले में फंसे आबकारी विभाग के 30 अधिकारियों के खिलाफ शासन से EOW को कार्रवाई की अनुमति मिल गई है। उनके खिलाफ जल्द EOW कार्रवाई कर सकती है।
इसमें तत्कालीन सहायक जिला आबकारी अधिकारी जनार्दन कौरव, अनिमेष नेताम उपायुक्त, विजय सेन शर्मा उपायुक्त, अरविंद पाटले, प्रमोद नेताम, रामकृष्ण मिश्रा, विकास गोस्वामी सहायक आयुक्त, इकबाल खान, नितिन खंडुजा, नवीन प्रताप सिंह तोमर के नाम शामिल हैं।
इसके अलावा मंजु केसर, सौरभ बख्शी, दिनकर वासनिक, अशोक सिंह, मोहित जायसवाल, नीतू नोतानी, रविश तिवारी, गरीबपाल दर्दी, नोहर सिंह ठाकुर जिला आबकारी अधिकारी समेत अन्य अधिकारी शामिल हैं। इनके खिलाफ चार्जशीट भी पेश की जा सकती है।
इनके घर पर पड़ा छापा
- रायपुर कांग्रेसी नेता जी नागेश, ठेकेदार कमलेश नाहटा।
- जगदलपुर : कंप्यूटर कारोबारी प्रेम मिगलानी।
- दंतेवाड़ा : कांग्रेसी नेता राजकुमार तामो।
- सुकमा : योग आयोग के पूर्व सदस्य राजेश नारा, हार्डवेयर कारोबारी अनीश बोथरा, पेट्रोल पंप संचालक जयदीप भदौरिया, पूर्व मंत्री लखमा के ड्राइवर शेख बशीर और बशीर अहमद।
क्या है शराब घोटाला ?
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था।
ED की ओर से दर्ज कराई गई FIR की जांच ACB कर रही है। ACB से मिली जानकारी के अनुसार साल 2019 से 2022 तक सरकारी शराब दुकानों से अवैध शराब डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर बेची गई। इससे शासन को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हुआ है।