शिक्षकों की बढ़ी मुश्किलें!

Chhattisgarh Crimesसरकारी स्कूलों में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। एक ही परिसर में संचालित या कम दर्ज संख्या वाले स्कूलों को समीप के बड़े स्कूलों में मर्ज किया जा रहा है। बिलासपुर जिले में 431 स्कूलों का एकीकरण हो चुका है, वहीं पूरे बिलासपुर संभाग में यह संख्या 3085 तक पहुंच गई है।

अब बारी अतिशेष शिक्षकों की है। जहां ज़रूरत से ज़्यादा शिक्षक हैं, वहां से उन्हें हटाकर ज़रूरतमंद स्कूलों में भेजा जाएगा। इससे शिक्षकों में असमंजस और बेचैनी बढ़ गई है, ख़ासकर वे शिक्षक जो शहर या मनपसंद स्कूलों में पदस्थ हैं।
शिक्षा विभाग का कहना है कि इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह है कि सभी स्कूलों में आवश्यकता के अनुसार शिक्षक मौजूद रहें, ताकि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। ज़्यादा और कम शिक्षक वाली स्थिति को ख़त्म कर संतुलन स्थापित किया जा रहा है। लेकिन अब इसे लेकर शिक्षक विरोध पर हैं। रायपुर में इसे लेकर आंदोलन भी शुरू कर दिया गया है।

डीपीआई को भेजी जाएगी अतिशेष शिक्षकों की सूची

शहरी इलाके में आधा किमी के अंदर स्थित स्कूल में 30 से कम दर्ज संख्या होने और ग्रामीण इलाकों में एक किलोमीटर के अंदर 10 से कम दर्ज संख्या होने पर युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। अतिशेष शिक्षकों की सूची बनने का काम शुरू हो गया है। ब्लॉकों से शिक्षकों की सूची बनाकर जिला शिक्षा कार्यालय बुलाया गया है। जहां से जिला स्तर की अतिशेष शिक्षकों की सूची तैयार होगी। इसके बाद उसको डीपीआई के पास भेजा जाएगा।

मर्ज होने वाले स्कूलों की संख्या

जिला – स्कूल
बिलासपुर – 431
मुंगेली – 337
कोरबा – 469
जांजगीर-चांपा – 366
रायगढ़ – 557
सक्ती – 342
सारंगढ़-बिलाईगढ़ – 378
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही – 205

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