
जगदलपुर। बस्तर में रावघाट रेल परियोजना का काम कई सालों से अटका पड़ा है। राजधानी रायपुर से बस्तर को रेल मार्ग से जोड़ने के लिए रेल लाइन बिछनी थी। रायपुर से अंतागढ़ तक रेल लाइन बिछाने का काम लगभग डेढ़ साल पहले ही पूरा हो गया है। लेकिन अंतागढ़ से जगदलपुर तक का काम शुरू करवाने रेलवे विफल रहा है। बताया जा रहा है कि भूमि अधिग्रहण और नक्सल समस्या की वजह से काम आगे नहीं बढ़ पाया है। साथ ही केंद्र और राज्य सरकार के बीच इन्हीं मसलों को लेकर काम अटका पड़ा है।
भूमि अधिग्रहण के लिए केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। जिस इलाकों से पटरियां बिछनी हैं वहां भूमि अधिग्रहण करने का काम राज्य सरकार का है। लेकिन, अब तक भूमि अधिग्रहण नहीं किया गया है। इसलिए काम अधूरा है। वहीं इलाका पूरी तरह से नक्सलियों का गढ़ है। दूसरी वजह नक्सल समस्या भी बताई जा रही है। साल 2023 तक रावघाट से लेकर जगदलपुर तक करीब 141 किमी तक पटरियां बिछनी थीं। लेकिन इसके लिए काम शुरू नहीं हो सका है। जबकि रायपुर-अंतागढ़ के बीच पटरियां बिछ गई है।
रायपुर से बस्तर को रेलवे मार्ग से जोड़ने के लिए कुल 2 फेज में काम होना था। इसके लिए साल 2003 से लेकर 2015 तक करीब 3 बार MOU हो चुका है। छत्तीसगढ़ शासन, NMDC, सेल और रेलवे इन चारों के बीच MOU हुआ था। इनमें अंतागढ़ तक लाइन बिछाकर पहले फेज का काम खत्म कर लिया गया है। लेकिन इससे आगे रावघट से जगदलपुर तक दूसरे फेज का काम नहीं हो सका है।
रावघाट रेल परियोजना का अटका काम शुरू करवाने की मांग को लेकर अब बस्तरवासी आंदोलन पर उतर आए हैं। अंतागढ़ से सैकड़ों की संख्या में लोग जगदलपुर तक पदयात्रा पर निकले हैं। इस पदयात्रा को रेल जागरण अभियान नाम दिया गया है। अंतागढ़ से सोमवार को यह पदयात्रा शुरू हुई थी, जिसका आज तीसरा दिन है। पदयात्रा में शामिल लोग आज नारायणपुर पहुंचे हैं। 12 अप्रैल को संभागीय मुख्यालय जगदलपुर पहुंचेंगे।