
12 जगह अनाधिकृत डंप
रिपोर्ट के मुताबिक एसएलआरएम और गोधन न्याय योजना को जोड़ने से कचरे के संग्रहण, पृथक्करण और प्रसंस्करण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। इसके कारण कचरे को खुले क्षेत्रों में डंप किया जा रहा था। लेखापरीक्षा में नौ शहरी स्थानीय निकायों में 12 अनाधिकृत डंपिंग स्थल मिले। इसके अतिरिक्त छह परंपरागत डंप स्थलों का उपचार भी नहीं किया गया था।
बिलासपुर, कवर्धा व बगीचा पर 164 करोड़ का कर्ज
राज्य सरकार विभिन्न विकास कार्यों के लिए स्थानीय निकायों को कर्ज देती है। 31 मार्च 2022 को नगर निगम बिलासपुर, नगर पालिका परिषद कवर्धा और नगर पंचायत बगीचा पर 164. 86 करोड़ का कर्ज बकाया था। वर्ष 2021-22 के दौरान 2.94 करोड़ के मूलधन और 0.55 करोड़ के ब्याज का भुगतान किया गया था।
कॉलोनाइजर को 1.54 करोड़ का अनुचित लाभ
नगर पालिका परिषद कांकेर में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए कम मूल्य वाली भूमि का हस्तांतरण किया गया। इसके कारण कॉलोनाइजर को 1.54 करोड़ रुपए का अनुसूचित वित्तीय लाभ पहुंचा। वहीं नगर निगम कोरबा में भूमि की अनुचित दर उपयोग किए जाने के कारण तीन कॉलोनाइजरों को 76 लाख रुपए के कम की वसूली हुई। इसके अलावा कोरबा में ही ठेकेदार को कार्य में प्री-स्ट्रेस्ड सीमेंट कंक्रीट पाइप का उपयोग किए जाने पर प्री-कास्ट कंक्रीट पाइप के लिए लागू उच्च दरों पर भुगतान किया गया। इससे ठेकेदार को 7.88 करोड़ का अधिक भुगतान हुआ।
निगरानी और मूल्यांकन तंत्र में भी कमी
रिपोर्ट में कहा गया है कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए निगरानी और मूल्यांकन तंत्र प्रभावी नहीं था। प्रदेश में राज्य स्तरीय सलाहकार बोर्ड का गठन किया था, लेकिन उनकी सिफारिशों पर क्रियान्वयन नहीं किया। वहीं छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण बोर्ड ने भी इसकी गतिविधियों की समीक्षा नहीं की।
14वें वित्त आयोग से कम मिली राशि
स्थानीय निकायों को भारत सरकार से राशि भी कम मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार ने वर्ष 2015-16 से 2019-20 के दौरान 14वें वित्त आयोग से 1587.91 करोड़ मंजूर किए थे। इसके विरुद्ध केवल 1403. 08 करोड़ रुपए ही मिले।