सुकमा में 7 गांव डूबे, 100 परिवारों का रेस्क्यू

Chhattisgarh Crimes

सुकमा। छत्तीसगढ़ के बस्तर में पिछले कई दिनों से लगातार बारिश हो रही है। जिससे शबरी नदी उफान पर है। शबरी नदी का पानी अब कोंटा ब्लॉक मुख्यालय में घुस गया है। जिससे कोंटा नगर पंचायत के करीब 5 वार्ड पूरी तरह से डूब गए हैं। इधर, 7 से ज्यादा गांव भी बाढ़ की चपेट में आए हैं। रेस्क्यू टीम गांवों में बोट के सहारे पारा-मोहल्ले के चक्कर लगा रही है। बताया जा रहा है कि अब तक 100 से ज्यादा परिवारों का रेस्क्यू किया जा चुका है। सभी लोगों को राहत शिविर कैंप में रखा गया है। NH-30 भी जलमग्न हो गया है।

जिधर नजर घुमाओ सब जगह सिर्फ पानी ही पानी।

शुक्रवार की दोपहर 12 बजे तक शबरी नदी का पानी 70 फीट पर था। शबरी का जलस्तर हर मिनट में बढ़ रहा है। कोंटा नगर पंचायत के वार्ड नंबर 5, 6, 13, 14 और 15 डूब गए हैं। साथ ही डोंड्रा, संदीपगुड़ा, इंजरम, फंदीगुड़ा समेत अन्य गांव भी बाढ़ की चपेट में आए हैं। इन सभी वार्ड और ये दोनों गांव के 100 परिवार के सैकड़ों लोगों का रेस्क्यू किया गया है। सभी को कोंटा में ही बनाए गए राहत शिविर कैंप में लाकर रखा गया है। जहां, प्रशासन की टीम ने सभी के लिए खाने से लेकर रहने तक का बंदोबस्त किया है।

प्रशासन की माने तो यदि लगातार बारिश होती रही तो शबरी नदी का पानी कोंटा के आस-पास के कुल 19 गांवों में पहुंचेगा। यानी ये गांव भी डूब जाएंगे। फिलहाल 7 गांव पूरी तरह से डूब गए हैं। प्रशासन ने शेष 12 गांवों में अलर्ट जारी कर दिया है। जैसे-जैसे शबरी नदी का जलस्तर बढ़ रहा है वैसे-वैसे हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। फिलहाल, CRPF, NDRF, DRG, STF, कोबरा और जिला पुलिस बल के जवान लोगों को सुरक्षित निकालने में लगे हुए हैं।

पानी में डूबी कार।

छत्तीसगढ़-तेलंगाना रूट बंद

शबरी नदी के उफान पर आने से सड़क जलमग्न हो गई है। छत्तीसगढ़ का तेलंगाना से संपर्क टूट गया है। छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे तेलंगाना का विरापुरम भी बाढ़ की चपेट में आ गया है। तेलंगाना सरकार और वहां की प्रशासन भी बॉर्डर इलाकों में बसे गांवों तक राहत पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ से संपर्क बनाए हुए हैं। NH-30 में पानी आने से अब इन दोनों राज्यों का संपर्क पूरी तरह से टूट गया है।

मवेशियों का पता नहीं

जो गांव बाढ़ में डूब गए हैं, वहां के ग्रामीणों का तो रेस्क्यू किया जा रहा है, लेकिन उन गांव के ग्रामीण जिन्होंने अपने मवेशी पाल रखे थे उन मवेशियों का कोई पता नहीं है। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि, इक्का-दुक्का लोगों ने बारिश शुरू होने से पहले ही ऐसे गांव जहां पर बाढ़ का पानी नहीं पहुंचता है, वहां अपने मवेशी लेकर चले गए हैं। बहुत से पालतू मवेशी गांव में थे, फिलहाल उनका कोई पता नहीं है।

बीजापुर में हालात बेकाबू

सुकमा जिले की शबरी नदी आगे जाकर गोदावरी नदी से मिल जाती है। यही वजह है कि यह दोनों ही विशाल नदी पूरी तरह से उफान पर हैं। शबरी के गोदावरी में मिलने से बीजापुर जिले में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। तारलागुड़ा गांव पूरी तरह से डूब गया है। उसके अलावा आस-पास के कई ऐसे गांव है जो टापू के रूप में तब्दील हो चुके हैं। फिलहाल वहां भी प्रशासन की टीम लोगों को गांव से निकालने के लिए जद्दोजहद कर रही है।