भाठागांव स्थित जलशुद्धिकरण संयंत्र से 70 लाख लीटर पानी रोज हो रहा बर्बाद, अब पांच करोड़ का प्लांट लगाकर रोकेंगे बर्बादी

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रायपुर. नगर निगम रायपुर के भाठागांव स्थित जलशुद्धिकरण संयंत्र से पानी को शुद्ध करने के दौरान हर 24 घंटे में 70 लाख लीटर बैकवाॅश वाटर बिना उपयोग के नाले में बहकर बर्बाद हो रहा है। औसतन 5 से 7 एमएलडी बैकवाॅश वाटर का उपयोग नगर निगम नहीं कर पा रहा है। बरसात के सीजन यह मात्रा बढ़कर 7 से 9 एमएलडी तक पहुंच जाती है। यदि इस अशुद्ध पानी को दोबारा फिल्टर किया जाए तो प्रतिदिन 70 लाख लीटर पीने का पानी शहरवासियों के पुन: उपयोग लायक हो जाएगा। इसके लिए प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इस प्रोजेक्ट पर 5 करोड़ खर्च होंगे। रायपुर नगर निगम का जल विभाग अब रोज 70 लाख लीटर बैकवाॅश वाटर को ट्रीटमेंट कर दोबारा उपयोग लायक बनाकर फिल्टर प्लांट में वापस भेजेगा।

इससे गंगरेल बांध से रोजाना मिलने वाले 200 क्यूसेक रॉ-वाटर का पूरा-पूरा उपयोग शहरवासी अपनी प्यास बुझाने के लिए कर पाएंगे। वर्तमान में जल शुद्धिकरण प्लांट से पानी को साफ करने की प्रक्रिया के दौरान कुल प्राप्त जल का 2 से 7 फीसदी हिस्सा रॉ-वाटर के रूप में बिना किसी उपयोग के नाले में फिजूल में बहता रहा है। जल विभाग के अधिकारियों का कहना है, फिल्टर प्लांट से रॉ-वाटर शुद्ध करने प्लांट में लगाए गए 24 मड बेड से बारिश के दिनों में 24 घंटे में 70 लाख लीटर बिना उपयोग के बह जा रहा है। इसका स्टोरेज दोबारा फिल्टर के लिए किया जाए तो यही शुद्ध पानी लाखों परिवारों की प्यास बुझाने के काम आएगा।

अमृत मिशन फेज- 1 के तहत फिल्टर प्लांट से निकलने वाले बैकवाॅश वाटर को उपयोग लायक बनाने प्रोजेक्ट की री-डिजाइनिंग की गई है। रॉ-वाटर को पंपिंग कर प्लांट स्थल पर दोबारा क्लोरीनेशन किया जाएगा। पानी साफ होते ही इसे शहरवासियों की जरूरत हिसाब से शहर की 33 पानी टंकियों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। विदित हो, बैकवाॅश वाटर के कुछ हिस्से का ही उपयोग अभी तक नगर निगम द्वारा शहर में स्थित बगीचों में लगाए गए पौधों को सींचने, डिवाइडर में लगे पौधों को पानी देने और और भवन निर्माणकर्ताओं को भवन निर्माण के लिए शुल्क देकर उपलब्ध कराया जाता रहा है, पर नए प्रोजेक्ट का काम पूरा होेने के बाद जीरो वेस्ट वाटर का कांसेप्ट पूरा हो जाएगा।