
किशन सिन्हा छुरा
छुरा. छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्र में बसे ग्राम मेड़कीड़बरी(रसेला) के शैलेन्द्र ध्रुव जो प्राइजेरिया नमक लाइलाज बीमारी से ग्रसित है इस बीमारी के असर से बच्चे शारीरिक रूप से बूढ़े नजर आने लगते हैं आमतौर पर यह देखा जाता है कि इस तरह की बीमारी से ग्रसित बच्चे अपने आप को मायुस महसूस करतें हैं लेकिन गरियाबंद जिले के बिहड़ वनांचल में निवासरत शैलेंद्र ध्रुव अपने दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर जिला के सबसे कम उम्र के उद्घघोषित कलेक्टर होने का गौरव पा चुके हैं।

उन्होंने शारीरिक रूप से कमजोर होने के बावजूद प्रबल इच्छाशक्ति के दम पर बीमारियों से लड़ते हुए 12वीं की परीक्षा सत्र 2022-23 में अपने गांव से लगभग 3 किलोमीटर दूर ग्राम रसेला हाईस्कूल से उत्तीर्ण कर ली है और आगे की उच्च शिक्षा अर्जित करने हेतु महाविद्यालय जाना होगा।
गौरतलब है कि शारीरिक अक्षमता के चलते वे अपने दैनिक क्रियाकलापों हेतु अपने परिजनों पर निर्भर हैं, इस कारण यदि वें आपने गांव से समीपस्थ महाविद्यालय का चुनाव भी करें तो वह उन्हें करीबन 20 किलोमीटर दूर जाकर प्राप्त होगा, वैसे तो आने-जाने हेतू शासन द्वारा इ-साइकल प्रदान किया गया है किन्तु लम्बी दूरी हेतु उन्हें यह उचित प्रतीत नहीं हो रहा है अब आगे की पढ़ाई हेतु शैलेन्द्र ध्रुव को शासन प्रशासन से मदद की आस है।