
किशन सिन्हा, छुरा
छुरा/ लोकतंत्र में जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु शासन और प्रशासन विकास के दो पहिए माने जाते हैं और किसी भी मोटर गाड़ी या वाहन को सुचारू रूप से चलने के लिए उनके दोनों पहियों का आपस में सामंजस्य स्थापित होना बेहद ही अनिवार्य होता है शासन द्वारा बनाए गए कानून को जनता तक क्रियान्वित करने का काम शासन करता है वही प्रशासन उसे सुचारछ रूप से जनता तक पहुंचाने हेतु प्रशासनिक अधिकारियों को जिस प्रकार की भी समस्या हो उसका निराकरण करना शासन की जिम्मेदारी है।
इन्हीं जिम्मेदारी को मध्य नजर रखते हुए राजस्व पटवारी संघ द्वारा अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर दिसंबर 2020 में अलग-अलग चरणों में आंदोलन किया गया था जिसके परिणाम स्वरूप उनके कुछ मांगों जैसे स्टेशनरी भत्ता, नेट भत्ता आदि को 2021 में स्वीकृत तो किया गया था, लेकिन आज की स्थिति में भी उन्हें धरातलीय स्तर पर क्रियान्वित नहीं किया गया। यही कारण है कि लगातार तीन सालों से करते आये मांगों को लेकर पटवारी संघ छुरा आज की स्थिति में अपने आठ सूत्रीय मांगों को साथ लिए हड़ताल पर बैठा हुआ है इन मांगों में – वेतन विसंगति दूर करने हेतु वेतन में बढ़ोतरी की मांग,वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति,संसाधन एवं भत्ता,स्टेशनरी भत्ता, अतिरिक्त प्रभार के हल्के का भत्ता,पटवारी भर्ती हेतु योग्यता स्नातक स्तर तक किया जावे मुख्यालय निवास की बाध्यता समाप्त हो,बिना विभागीय जांच के एफ आई आर दर्ज ना हो, आदि विषयों पर जोर दिया जा रहा है।
इस विषय पर पटवारी संघ छुरा के ब्लॉक अध्यक्ष झामन यादव का कहना है कि लगातार 3 वर्षों से हम अपने विभिन्न मांगों को लेकर समय-समय पर सरकार को अवगत कराते हैं लेकिन सरकार ने हमारी समस्याओं पर अब तक ध्यान नहीं दिया है अब हमने यह ठान लिया है कि जब तक हमारी समस्याओं का निराकरण न किया जाएगा तब तक हम इस भीषण गर्मी में भी आंदोलन हड़ताल जारी रखेंगे इससे आम जनता व विभाग प्रभावित तो हो रहा है लेकिन समस्या जटिल होने के चलते इनका समाधान कितना आवश्यक है।