गृह मंत्री विजय शर्मा ने रायपुर सेंट्रल जेल का लिया जायजा

Chhattisgarh Crimes

रायपुर। छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा बुधवार को रायपुर स्थित सेंट्रल जेल का जायजा लेने पहुंचे थे। यहां उन्होंने कैदियों से जुड़ी कई व्यवस्थाओं और समस्याओं के बारे में जानकारी ली। गृह मंत्री विजय शर्मा ने जेल के अंदर कैदियों की खान-पान, मुलाकात और सुरक्षा जैसे तमाम बिंदुओं पर अधिकारियों से बातचीत की।

गृह मंत्री विजय शर्मा ने जेल का जायजा लेने के बाद मीडिया से बातचीत की। जिसमें उन्होंने कहा कि जेल के अंदर वे उस जगह पर भी गए, जहां उन्हें फर्जी FIR करके बंद किया गया था। साथ ही उन्हें कैदियों से यहां की व्यवस्थाओं को लेकर बातचीत की।

गृहमंत्री ने कहा कि मैंने कैदियों से बातचीत की जिसमें उन्हें भी ये जानकारी थी कि आने वाले 22 जनवरी को भगवान राम 500 साल बाद अपने घर पर वापस आ रहे है। जिसके चलते मैंने कहा है कि रायपुर सेंट्रल जेल के साथ-साथ राज्य के तमाम जेलों में लाइटिंग होगी, दीप जलेंगे और मिठाइयां बांटी जाएगी।

हम चाहते है, जेल जैसी जगह पर कोई न आए ऐसा समाज हमारा होना चाहिए। यहां की व्यवस्था और बेहतर कैसे हो, हम प्रयास कर रहे है। घरवालों से कैदियों की मुलाकात अधिक हो। इसके लिए टेक्नोलॉजी बेस्ड उपाय सोच रहे है।

जेल में क्षमता से अधिक कैदियों होने के सवाल पर गृह मंत्री ने कहा कि ये स्थिति सभी जिलों में भी है। हमने यहां पर 10 नए बैरक बनाने की बात की है। जिसे जल्द बनाकर शुरू किया जायेगा। जेल में होने वाले गैंगवार से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यहां बैरक इस ढंग से बने है कि गैंगवार जैसी स्थिति बन नही पायेगी। जिन कैदियों का स्थानांतरण संबंधी मुद्दे हैं वह भी साल्व होगा।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जेल को बिजनेस के दृष्टिकोण पर देखेंगे तो आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि जेल परिसर में एक प्रिंटिंग प्रेस है। यहां दरी और कई सारी चीजों का निर्माण हो रहा है। यहां के प्रिंटिंग प्रेस का साल का 2 करोड़ का टर्नओवर है। इसे और बढ़ाने के लिए कोशिश करेंगे।

नक्सलियों से मुलाकात के लिए तैयार

गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलियों से मुलाकात के लिए हम टेक्नोलॉजी के साथ-साथ प्रत्यक्ष रूप से मुलाकात के लिए भी तैयार है। लेकिन हमारा सवाल यही है कि गांव तक सड़क क्यों नहीं पहुंचनी चाहिए। गांव में यदि कोई बीमार होता है, तो उसे शहर तक क्यों नहीं लाना चाहिए। गांव में यदि कोई बच्चा कुपोषित होता है तो उसे आंगनबाड़ी क्यों न मिले। इसी तरह गांव में भी कम कीमत में राशन क्यों न मिले।

पुलिस कर्मियों को मिलने वाले साप्ताहिक अवकाश को लेकर गृह मंत्री ने कहा कि मैं पुलिस कर्मियों के माताओं-बहनों और परिवार के लोगों के साथ हूं। परिवार के लोग भी चाहते है कि घर के किसी काम में उनका सहयोग ले पाए। लेकिन छुट्टी नही होने की वजह से यह संभव नही हो पाता था। मैं इस कोशिश में हूं कि हर थाने में रोस्टर बने और वो अच्छे से लागू हो जाये।