आंगनबाड़ी की दूरी 7 किलोमीटर होने से बच्चे चाह कर भी वहां नहीं पहुंच पाते, ग्रामीणों की मांग गांव में खुले आंगनबाड़ी केंद्र

पूरन मेश्राम/मैनपुर। आजादी के 76वें साल बीत जाने के बाद भी मासूम बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा हो इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है सरकार कहती है अंतिम पंक्ति के गांव में बसाहट करने वाले लोगों के लिए शासन प्रशासन की समस्त सुविधाएं बराबर पहुंचेगी जिसका संकल्पित भाव से बया भी करते हैं। लेकिन जमीनी धरातल में कहानी कुछ उल्टा होता है।
विकासखंड मुख्यालय मैनपुर से लगभग 29 किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ राजापड़ाव क्षेत्र के गोना ग्राम पंचायत के आश्रित गांव रक्शापथरा जहां पर लगभग 40 मकान संख्या के साथ ही 180 के आसपास जनसंख्या वाला आदिवासी बाहुल्य गांव में लगभग 44 बच्चे 0 से 5 वर्ष के हैं जिन्हें प्रारंभिक शिक्षा के साथ ही आंगनबाड़ी केंद्र से मिलने वाली सुविधा पूर्ण रूपेण नहीं मिल पा रही है।
जिन बच्चों का नाम आंँगनबाड़ी केंद्र में दर्ज है उसकी दूरी रक्शा पथरा गांव से लगभग सात किलोमीटर है। जहां तक पहुंँचना मासूम बच्चों के लिए क्या जवानों के लिए भी मुश्किल भरा काम होता है। जंगलों से घिरा हुआ उबड़ खाबड़ पगडंडी कच्ची सड़क वाला इलाका है। गांव में ही आंगनबाड़ी केंद्र खुले जिसके लिए ग्राम पंचायत गोना के द्वारा संबंधित विभाग को कई बार प्रस्ताव बनाकर दिया गया है। लेकिन अभी तक इस दिशा में पहला नजर नहीं आ रही है।
गांव के प्रताप सिंह नेताम, मानसिंह,सुंदरलाल,जोहर, चरण सिंह, श्री राम, दिलीप सिंह, महेश राम,जनार्दन,नवलू राम, कमलेश, जामिया राम, मोहन सिंह, प्रमिलाबाई, फुलबासन,राधाबाई,राजबाई, हीराबती,मिथिला,रामबाई ने जिला के कलेक्टर से गांव में आंगनवाड़ी केंद्र खुले इसके लिए विशेष रूप से मांग किया है।
