गर्मियों में ठंडकता के लिए आदिवासी पीते हैं मडिया का पेज, शरीर को रखता है ठंडा और दिनभर तरोताजा

Chhattisgarh Crimes

पूरन मेश्राम/ गरियाबंद। छत्तीसगढ़ में तेजी से गर्मी बढ़ रही है। गर्म हवाओ ने अपना तेवर दिखाने शुरू कर दिये है।कड़ी धूप और गर्मियों से परेशान शहरी लोगों को एसी कूलर का सहारा लेना पड़ रहा है। लोग ठंडकता के लिए शीतल पेय, कोल्ड ड्रिंक का सहारा लेते हैं।जिसमे हानिकारक रसायन होते है।जिनका दुष्प्रभाव शरीर में पड़ता है।

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इन सब से दूर आदिवासी इलाकों में लोग खुद को तरोताजा एवं ठंडा रखने के लिए एक खास तरह के पेय पीते है। जल जंगल जमीन से जुडे आदिवासी गर्मियों में खुद को एक विशेष आहार के साथ ठंडा रखते हैं। जिसे मडिया पेज कहा जाता है। जो मडिया (रागी) पाउडर और उबले हुए चावल की पानी से बना सूप है।गांव में रहने वाले लोग अपने शरीर को ठंडा रखने के खूब मडिया पेज पीते हैं।

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यह सभी घरों में तैयार किया जाता है। आदिवासी अंचलों मे ऋतुओं के अनुसार पारंपरिक रुप से खानपान, रहन-सहन, वेष भूषा भी देखा जा सकता है।आदिवासी वनांचल राजापड़ाव क्षेत्र,कुल्हाड़ी  घाट, तुहामेटा, कोनारी, ओड़, कोदोमाली,जांगड़ा,जुगाड़,कुरुभाँठा, इंदागांव, साहेबिनकछार,करलाझर,नागेश सहित अन्य आदिवासी बाहुल्य इलाको मे मड़िया पेज का विशेष महत्व है।  मड़िया पेज शरीर को दिन भर तरोताजा रखता है।

आदिकाल से वनांँचल के लोग मड़िया (रागी) की रोटी बनाकर के भी खाते हैं। औषधि गुणो से युक्त मडि़या (रागी) का आदिवासी इलाकों में विशेष महत्व है।गर्मियों में तेंदूपत्ता तोड़ने वाले या फिर जंगल जाने वाले लोग मडिया पेज (सूप) को साथ में लेकर चलते हैं। शरीर को ठंडकता एवं तरोताजा रखने के लिए पत्तल के दोना में बड़े चाव से पीते हैं।