पिथौरा वन परिक्षेत्र में गिरना के बाद अबफिर बुन्देली के जंगल में चीतल के साथ बैल की मौत

Chhattisgarh Crimesशिखा दास

छग क्राईम्स

महासमुन्द

⚡🌟वन्य जीव संरक्षण की धज्जियां उड़ाई जा रही वन परिक्षेत्र में डिप्टी रेंजर की संलिप्तता तस्करों शिकारियों के साथ ⚡

कक्ष क्रमांक 220 बुन्देली का संदिग्ध मामला./

 

⚡✍🏽 वनकर्मियों की मिलीभगत सेतस्करों के हौसले बुलन्द !!ग्रामीणों ने कहा

 

SDO/डिप्टी रेंजर बयान देने से क्यों डर रहें?

रेंजर ने कहा सिर्फ डिप्टी ही नहीं सभी TOP TO BOTTEMजिम्मेदार

विवेचना जारी;@

वन विभाग के डिप्टी रेंजर छबिराम साहु का एरिया है बुन्देली

उनकी लापरवाही मिलीभगत से शिकारियों तस्करों के हौसले बुलंद ऐसा ग्राम वासियों का कहना है

ग्रामीण को भनक लगते ही शिकारी चीतल व बैल को मृत हालात में छोड़ भागें!

📝*वन परिक्षेत्र बुन्देली में फिर उजागर हुई वन विभाग की लापरवाही*

*शिकारी बेखौफ कर रहे हैं वन्य प्राणी का शिकार*

*चीतल के साथ एक बैल की भी मौत*

*शिकारियों के साथ वनकर्मी एवं चौकीदार की मिलीभगत कीक्षेत्र में चर्चा*

वन परिक्षेत्र बुन्देली में लाखों रुपए का घोटाला जल्द होगा खुलासा

वन विभाग को वन्य जीवों से कोई सरोकार नही है .. लाखो रुपए वन्य जीवों के देख रेख लिए आते हैं पर अधिकांश राशि का बंदरबांट कर दिया जाता है

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, वन विभाग का वन्य जीवों की वास्तविक देखरेख से कोई सरोकार नहीं दिखता। न तो संरक्षित क्षेत्रों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं और न ही नियमित निगरानी की कोई व्यवस्था है। इसके बावजूद बजट जारी किया जाता है, जो कथित तौर पर कागज़ों में ही खर्च हो जाता है।

💹🌳 बेधड़क जंगलों की कटाई

सबसे बड़ा सवाल ठाकुर दिया खुर्द जंगल। टेका डोंगरी पाली गिरना सुखी पाली अनेकों क्षेत्रों से प्रति दिन जंगल से लकड़ी को प्रति सायकल लकड़ी लाकर 4 सौ पांच सौ में बेच रहे हैं और मोटी रकम कमाई कर रहे हैं। इस पर कोई निगरानी नहीं हो रहा हैं वन कर्मियों की मिलीभगत के कारण तो वन्य प्राणी संरक्षित कैसे रह सकते है?

यह स्थिति वास्तव में चिंताजनक और दुखद है। पिथौरा परिक्षेत्र जैसे जैवविविधता से भरपूर जंगलों में इस तरह की घटनाएं वन्यजीव संरक्षण की विफलता को उजागर करती हैं। वन्यजीवों के लिए एक गंभीर खतरा भी है।

💥💥सरकारी बजट सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाने में ?💥💥

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, वन विभाग का वन्य जीवों की वास्तविक देखरेख से कोई सरोकार नहीं दिखता।

न तो संरक्षित क्षेत्रों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं और न ही नियमित निगरानी की कोई व्यवस्था है।

इसके बावजूद बजट जारी किया जाता है, जो कथित तौर पर कागज़ों में ही चल रहा है वन्य जीव संरक्षण खर्च हो जाता है।

मासूम चीतल की मौतों में चाहे गिरना हो या बुन्देली क्या पिथौरा वन मंडल क्लीन चिट दे देने की तैयारी में हैं

अगर बेगुनाह जीव को मारने वाले बेगुनाह है तो फिर बयान देने से SDO. डिप्टी रेंजर बच क्यों रहें?