राजधानी के पान मसाला कारोबारी के खाते में यूपीआई के माध्यम से ग्राहक ने 10 रुपए पेमेंट किया। दस दिन बाद उनका खाता ब्लॉक हो गया। इसी खाते में कारोबार का पैसों का ट्रांजेक्शन होता है। वे बैंक गए तब पता चला खाता पुलिस ने ब्लॉक कराया है। उन्हें भुगतान किया गया 10 रुपए ठगी का पैसा था।
ओडिशा के स्टील और बलौदाबाजार के ऑटोमोबाइल कारोबारी की भी यही कहानी है। उन्हें 10 हजार तक का ऑनलाइन पेमेंट आया खाता ब्लॉक हो गया। ऐसे एक-दो नहीं केवल रायपुर में ही 600 से ज्यादा छोटे बड़े कारोबारी हैं, जिनका खाता ब्लॉक हैं। अब वे अपना खाता खुलवाने कोर्ट, पुलिस और बैंक के चक्कर काट रहे हैं।
दरअसल ठग अलग-अलग लेयर में पैसे ट्रांसफर करने के बाद निश्चित हो जाते हैं कि अब पुलिस ट्रैक नहीं करेगी और वे ठगी की रकम खर्च करने लगते हैं। पुलिस अब 8 लेयर तक जांच कर रही है। एक बार खाता ब्लॉक होने के बाद कारोबारी कानूनी प्रक्रिया में उलझकर तीन-तीन महीने परेशान हो रहे हैं।
शहर के लगभग हर थानों में हफ्ते में दो-तीन शिकायतें पहुंच रही हैं। इनमें खासबात ये है कि छत्तीसगढ़ की पुलिस से ज्यादा खाते महाराष्ट्र, बंगलुरु, ओडिशा, दिल्ली और आंध्रप्रदेश सहित अन्य राज्यों की पुलिस ने करवाए हैं। कारोबारी चूंकि व्यापार के लिए उन्हीं बैंक खातों का उपयोग करते हैं इसलिए वे परेशान हो रहे हैं। मालवीय रोड स्थित पान कारोबारी का खाता तो केवल 10 रुपए के कारण ब्लॉक हुआ है।
तीन माह से चक्कर काट रहे बलौदाबाजार निवासी वीरू साहू का ऑटो मोबाइल का कारोबार है। तीन माह पहले एटीएम से पैसा निकालने की कोशिश की। ट्रांजेक्शन फेल हो गया। वे बैंक गए। बैंक के अधिकारी ने जांच के बाद बताया कि पुलिस ने खाता ब्लॉक कराया है। कारण जानने वे थाने पहुंचे। वहां से रायपुर भेजा गया। साइबर सेल की पड़ताल में पता चला कि ऑनलाइन ठगी का पैसा 8वें लेयर में उनके खाते में पहुंचा है। बेंगलुरु पुलिस ने उनका खाता ब्लॉक कराया। उसी समय उन्होंने कोर्ट में अर्जी लगा दी है। पर खाता नहीं खुला।
स्टील कारोबारी का खाता ब्लॉक कारोबारी एसएन अग्रवाल का ओडिशा में स्टील का बड़ा कारोबार है। उनकी कंपनी का खाता रायपुर पुलिस ने ब्लॉक कराया है। उन्होंने रायपुर आकर शिकायत की। पुलिस ने जांच की और बताया कि उन्हें जो 10 हजार पेमेंट किया गया है वह ठगी का पैसा था। इस वजह से खाता ब्लॉक कराया गया है। पुलिस ऑनलाइन ठगी की जांच कर रही थी। ठगी का पैसा तीन खातों में ट्रांसफर किया गया है। उसमें एक खाते का पैसा चार लोगों के खाते से होते हुए स्टील कारोबारी के कंपनी के खाते में पहुंचा है। अब वे कानूनी प्रक्रिया में उलझ गए हैं।