छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर के एसपी यशपाल सिंह की नियुक्ति को लेकर हुई शिकायत मामले में केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार और यूपीएससी से रिपोर्ट मांगी है। दरअसल, यशपाल सिंह के खिलाफ सोशल एक्टिविस्ट विवेक कुमार सिंह ने बीएसएफ से छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस सेवा में समायोजन और फिर आईपीएस पदोन्नति को लेकर शिकायत की थी।
जिस पर केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने संज्ञान लेते हुए पूरे मामले में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सचिव को पत्र भेजा है। केन्द्र ने इस मामले पर जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
क्या है मामला?
शिकायत में कहा गया है कि यशपाल सिंह, जो पहले बीएसएफ में कमांडेंट थे, उन्हें नियमों को दरकिनार कर छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस सेवा में मर्ज कर लिया गया। इसके बाद उन्हें वर्ष 2019 में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में पदोन्नति दे दी गई। साथ ही, उन्हें 2013 बैच के आईपीएस अधिकारी के रूप में पदस्थ किया गया।
इतना ही नहीं, यह आरोप भी है कि उनके खिलाफ आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) में जांच लंबित थी। बावजूद इसके उन्हें आईपीएस अवार्ड दे दिया गया। यह प्रक्रिया पारदर्शिता और नियमों की स्पष्ट अनदेखी दर्शाती है।
PSC और पुलिस एसोसिएशन ने भी जताई थी आपत्ति
गृह मंत्रालय के पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि इस नियुक्ति को लेकर छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) ने आपत्ति जताई थी। साथ ही, छत्तीसगढ़ पुलिस ऑफिसर्स एसोसिएशन ने भी नाराजगी जताते हुए पत्र लिखा था।
इसके बावजूद न केवल यशपाल सिंह को आईपीएस अवार्ड मिला, बल्कि उन्हें वरिष्ठता के आधार पर 2013 बैच भी दे दिया गया।
चार बिंदुओं पर जांच का निर्देश
गृह मंत्रालय ने मुख्य सचिव का ध्यान विशेष रूप से चार बिंदुओं पर कहा है।
- बीएसएफ से राज्य पुलिस सेवा में समायोजन की वैधता।
- 2019 की आईपीएस चयन प्रक्रिया में उनका नाम शामिल करने की प्रक्रिया।
- EOW जांच लंबित रहने के बावजूद आईपीएस अवार्ड का औचित्य।
- PSC और एसोसिएशन की आपत्तियों की अनदेखी।