छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन गुरुवार को सदन में तीखी बहस के आसार हैं। आज मनरेगा, पंचायत, स्कूल शिक्षा, उद्योग और पर्यावरण से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। प्रश्नकाल और ध्यानाकर्षण के दौरान इन विभागों से संबंधित सवालों पर भाजपा-कांग्रेस विधायकों और मंत्रियों के बीच टकराव देखने को मिल सकता है।
जानकारी के अनुसार कांग्रेस विधायक मनरेगा भुगतान में देरी, जॉब कार्डधारियों को काम नहीं मिलने और पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार के मुद्दे को जोरशोर से उठाएंगे। वहीं भाजपा विधायक पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में हुई अनियमितताओं का जिक्र करते हुए वर्तमान योजनाओं की स्थिति स्पष्ट करेंगे।
पंचायतों में वित्तीय अधिकार, विकास कार्यों की रफ्तार और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी सवाल पूछे जाने की संभावना है। वहीं तीसरे दिन यानी मंगलवार को वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सदन में 35,000 करोड़ का सप्लीमेंट्री बजट पेश किया।
उद्योग और पर्यावरण से जुड़े विषयों होगी बहस
उद्योग और पर्यावरण से जुड़े विषयों पर भी बहस तेज रहने की उम्मीद है। विपक्ष औद्योगिक निवेश, पर्यावरणीय मंजूरी और स्थानीय रोजगार को लेकर सवाल उठाएगा। वहीं सत्ता पक्ष राज्य में नए उद्योगों के आगमन, निवेश प्रस्तावों और पर्यावरण संतुलन के दावों के साथ जवाब देगा।
सत्र के चौथे दिन शून्यकाल में भी कई स्थानीय और जनहित के मुद्दे उठने की संभावना है। सत्ता और विपक्ष दोनों के तेवर सख्त रहने के संकेत हैं। ऐसे में आज सदन में जोरदार बहस और तकरार देखने को मिल सकती है।
तीसरे दिन 35,000 करोड़ का सप्लीमेंट्री बजट पेश
शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सदन में 35,000 करोड़ का सप्लीमेंट्री बजट पेश किया। वित्तीय वर्ष खत्म होने से ठीक तीन महीने पहले पेश किए गए इस बड़े सप्लीमेंट्री बजट पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई।
इस दौरान वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि इससे प्रदेश के विकास को गति मिलेगी। विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे बड़ा अनुपूरक बजट है। राजस्व व्यय को बढ़ाने की शुरुआत पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार ने की थी। कांग्रेस सरकार ने धान खरीदी को राजनीतिक विषय बना दिया।
वहीं कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ लगातार कर्ज में डूबता जा रहा है। ऐसे में वित्तीय वर्ष के आखिरी तीन महीनों में 35 हजार करोड़ रुपए का अनुपूरक बजट क्यों लाया गया, यह समझ से परे है। इस बजट में कोई ठोस विजन नजर नहीं आता।
राघवेंद्र सिंह ने कहा कि महिलाओं को महतारी वंदन योजना के तहत एक हजार रुपए दिए जा रहे हैं, लेकिन बिजली बिल के नाम पर उससे ज्यादा राशि वसूली जा रही है। सरकार का फोकस काम से ज्यादा इवेंट मैनेजमेंट पर है।
राघवेंद्र सिंह ने कहा कि नए पदों पर भर्ती, नियमितीकरण और किसानों को समय पर भुगतान जैसे वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। सड़कों, धान, आदिवासी, किसान, युवा और महिलाओं के विकास के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय कर काम करने की जरूरत बताई।