छत्तीसगढ़ शराब घोटाला केस में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने सोमवार को रायपुर की स्पेशल कोर्ट में पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के खिलाफ करीब 3800 पन्नों की चार्जशीट पेश की

Chhattisgarh Crimesछत्तीसगढ़ शराब घोटाला केस में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने सोमवार को रायपुर की स्पेशल कोर्ट में पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के खिलाफ करीब 3800 पन्नों की चार्जशीट पेश की है। EOW ने चार्जशीट में दावा किया है कि चैतन्य बघेल को घोटाले से 200-250 करोड़ रुपए मिले हैं।

EOW ने चार्जशीट में दावा किया है कि सिंडिकेट के माध्यम से अवैध उगाही की राशि का एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर चैतन्य बघेल से जुड़ा है। घोटाले में चैतन्य बघेल की सीधे संलिप्तता है। सिंडिकेट ने अलग-अलग टाइम पर करोड़ों रुपए चैतन्य बघेल तक पहुंचाए हैं।

​जांच एजेंसी ने कोर्ट को सौंपे दस्तावेजों में चैतन्य बघेल की संलिप्तता को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं। चैतन्य बघेल 18 जुलाई 2025 से जेल में है। वहीं 3 दिन पहले ED ने सौम्या चौरसिया को गिरफ्तार किया है। PMLA कोर्ट ने सौम्या चौरसिया को 14 दिन की रिमांड पर भेजा है। साथ ही पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को भी अरेस्ट किया गया है।

EOW-ACB ने दर्ज की है FIR, ED भी कर रही जांच

दरअसल, रायपुर EOW-ACB ने शराब घोटाला केस में FIR दर्ज की है। इसी FIR के आधार पर ED की टीम भी शराब घोटाले की जांच कर रही है। FIR में IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराएं लगाई गई थीं। इसके बाद दोनों एजेंसियां जांच कर रही हैं।

EOW-ACB और ED की जांच में पता चला कि शराब घोटाले से छत्तीसगढ़ सरकार के खजाने को भारी नुकसान हुआ है। सिंडिकेट ने करीब 2500 करोड़ रुपए की अवैध कमाई की है। ये पैसा नेता-मंत्री, कारोबारी और अफसरों में बंटा है। इनमें भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल का भी नाम है।

ED का दावा- चैतन्य के पास था नेटवर्क का कंट्रोल

ED की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि चैतन्य बघेल शराब सिंडिकेट के सर्वोच्च स्तर पर था। राजनीतिक प्रभाव के कारण नेटवर्क का कंट्रोल और फैसले लेने वाला व्यक्ति था। इकट्ठा की गई अवैध रकम का हिसाब भी रखता था। कलेक्शन, चैनलाइजेशन और वितरण से जुड़े सभी प्रमुख फैसले उसके डायरेक्शन पर लिए जाते थे।

ED ने बताया कि चैतन्य ने शराब घोटाले से कमाई की गई रकम को अपने रियल एस्टेट बिजनेस में लगाया। उसे वैध संपत्ति के रूप में दिखाने की कोशिश की। उसने यह पैसा अपनी फर्म एम/एस बघेल डेवलपर्स के तहत संचालित प्रोजेक्ट ‘विठ्ठल ग्रीन’ में लगाया।