गरियाबंद के सुपेबेड़ा गांव में किडनी की बीमारी से एक और मरीज की मौत हो गई है। 49 वर्षीय प्रेमजय क्षेत्रपाल ने एम्स रायपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इसके साथ ही साल 2005 से अब तक इस गांव में किडनी रोग से मरने वालों की संख्या 133 हो गई है।
प्रेमजय क्षेत्रपाल पिछले पांच सालों से घर पर ही पेरिटोनियल डायलिसिस करवा रहे थे। लगभग 20 दिन पहले उनके पेट में लगा डायलिसिस फिस्टुला ब्लॉक हो गया था। जिससे उनका नियमित डायलिसिस रुक गया। परिजनों ने उन्हें एक सप्ताह पहले एम्स में भर्ती कराया था।
एम्स में डॉक्टरों ने उनके हाथ में नया फिस्टुला लगाने का प्रयास किया, लेकिन मरीज की सहमति नहीं होने के कारण यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। प्रेमजय के परिवार में उनके माता-पिता और एक भाई सहित आठ से अधिक सदस्य पहले ही किडनी की बीमारी से जान गंवा चुके हैं। बीएमओ प्रकाश साहू ने प्रेमजय की मौत की पुष्टि की है।
अभी भी 40 से अधिक मरीज
सुपेबेड़ा गांव में अभी भी 40 से अधिक किडनी रोगी हैं, जिनमें से तीन का इलाज एम्स में चल रहा है। पंचायत के रिकॉर्ड के अनुसार, 2005 से अब तक 133 मौतें दर्ज की गई हैं, जबकि सरकारी आंकड़ों में यह संख्या 70 से 80 बताई जाती है। आधे से अधिक मरीज इलाज के लिए अन्य राज्यों में जा रहे हैं।
बीमारी के डर से ग्रामीणों ने अब खून की जांच कराना बंद कर दिया है। पिछले दो सालों से स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांव में किसी भी विशेषज्ञ टीम के साथ स्वास्थ्य शिविर का आयोजन नहीं किया गया है।
डायलिसिस मशीन भी नहीं लग पाई
गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) स्वीकृत है, लेकिन उसका भवन अभी तक नहीं बन पाया है। गांव के लिए भेजी गई डायलिसिस मशीन भी स्थापित नहीं की जा सकी है। दो डॉक्टरों में से अब केवल एक ही कार्यरत है और नेफ्रोलॉजी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की योजना भी अधर में लटकी हुई है।