छत्तीसगढ़ में बढ़ती गर्मी और पेयजल संकट को देखते हुए नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को अलर्ट मोड पर काम करने के निर्देश दिए

Chhattisgarh Crimesछत्तीसगढ़ में बढ़ती गर्मी और पेयजल संकट को देखते हुए नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को अलर्ट मोड पर काम करने के निर्देश दिए हैं। एक सप्ताह के भीतर हैंडपंप, बोरवेल और जलप्रदाय प्रणालियों की जांच कर खराब व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाए। पाइपलाइन लीकेज और टूट-फूट को तत्काल सुधारा जाए।

नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने हाल ही में समीक्षा बैठक में गर्मियों के दौरान लगातार और पर्याप्त पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा था। इसके बाद विभाग ने सभी निकायों को विस्तृत गाइडलाइन जारी की है।

निर्देश में कहा गया है कि, जिन वार्डों और बस्तियों में गर्मियों में जलस्तर नीचे चला जाता है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था कर पानी उपलब्ध कराया जाए। नालियों से गुजर रही पाइपलाइनों और हाउस सर्विस कनेक्शन को भी शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि दूषित पानी की समस्या न हो।

विभाग ने सभी निकायों में आयुक्त और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया है। उन्हें रोजाना पेयजल से जुड़ी शिकायतों की समीक्षा करनी होगी। शिकायतों को रजिस्टर में दर्ज कर तय समय सीमा में समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं।

भीड़भाड़ वाले इलाकों में खुलेंगे ‘प्याऊ घर’

सरकार ने बस स्टैंड, बाजार और भीड़भाड़ वाले इलाकों में प्याऊ घर खोलने को भी कहा है। यहां पानी के साथ कर्मचारियों की व्यवस्था करने और जरूरत पड़ने पर सामाजिक संस्थाओं व एनजीओ की मदद लेने के निर्देश दिए गए हैं। पशुधन के लिए भी पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने कहा गया है।

विभाग ने जल गुणवत्ता पर खास फोकस करने के निर्देश दिए हैं। हैंडपंप और जलस्रोतों में ब्लीचिंग पाउडर और सोडियम हाइपोक्लोराइड डालकर पानी को कीटाणुरहित करने, क्लोरीन की नियमित जांच और ओवरहेड टैंकों की सफाई कराने को कहा गया है।

अमृत मिशन और जल योजनाओं को 15 दिन की डेडलाइन

इसके अलावा 15वें वित्त आयोग और अमृत मिशन के तहत चल रही जल योजनाओं को जल्द पूरा कर शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन परियोजनाओं का काम लगभग पूरा हो चुका है, उन्हें 15 दिन के भीतर चालू करने कहा गया है, ताकि लोगों को राहत मिल सके।

विभाग ने जल संरक्षण पर भी जोर दिया है। निकायों को रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और रिचार्ज पिट बनाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण वाहनों के जरिए लोगों को पानी बचाने और जल संचयन के प्रति जागरूक करने कहा गया है।