बिलासपुर समेत पूरे प्रदेश में लगातार गिरते भूजल स्तर और हर साल बढ़ते पेयजल संकट को देखते हुए सरकार ने कड़ा रूख अपनाया

Chhattisgarh Crimesबिलासपुर समेत पूरे प्रदेश में लगातार गिरते भूजल स्तर और हर साल बढ़ते पेयजल संकट को देखते हुए सरकार ने कड़ा रूख अपनाया है। शहरी इलाके के सभी सरकारी, गैरशासकीय और प्राइवेट भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य किया गया है।

इसके लिए नगर निगम प्रशासन को सर्वे करने और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश के बाद निगम प्रशासन ने भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाने पर भवन मालिकों की जमा राशि जब्त करने की चेतावनी दी है।

निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे ने बताया कि, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लेकर सर्वे कराया जा रहा है। इसमें 150 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भवनों की संख्या, उनमें पहले से लगे सिस्टम और बाकी बचे भवनों की जानकारी जुटाई जा रही है।

साथ ही शहरों में भूजल स्तर और जमा सुरक्षा निधि का भी आकलन किया जा रहा है। इसमें ऐसे भवन मालिक जिन्होंने नक्शा पास कराते समय रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाने का दावा किया था, लेकिन सिस्टम नहीं बनाया है। उनकी जमा सुरक्षा राशि राजसात कर निकाय खुद एजेंसी के जरिए निर्माण कराएंगे।

मानसून से पहले कार्ययोजना बनाकर करेंगे काम

सरकार के निर्देश के बाद निगम प्रशासन अब केवल भवनों तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि, उद्यानों, बोरवेल और हैंडपंपों के पास भी रिचार्ज पिट बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। दावा किया जा रहा है कि मानसून से पहले जल पुनर्भरण की व्यवस्था पूरी की जाएगी। ताकि, बारिश का पानी सीधे जमीन में जा सके और भूजल स्तर सुधरे।

इसके लिए निगम प्रशासन विस्तृत कार्ययोजना बनाकर काम करने की तैयारी में है। इसकी लगातार मॉनिटरिंग भी की जाएगी। जिसमें दो महीने बाद यह मूल्यांकन किया जाएगा कि कितनी नई संरचनाएं बनीं और बारिश के बाद भूजल स्तर में कितना सुधार आया।

मिशन मोड पर काम करने के निर्देश

राज्य सरकार ने चिंता जताई है कि, गर्मी के दौरान हर साल भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है, जिससे कई शहरों में पानी का संकट गहराता जा रहा है। इसी स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री स्तर पर यह निर्णय लिया गया है।

इसके तहत नगरीय प्रशासन विभाग ने आदेश जारी कर सभी कलेक्टरों, नगर निगम आयुक्तों और नगर पालिका अधिकारियों को 15 जून 2026 तक मिशन मोड में काम पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। इसमें कहा है कि सरकारी कार्यालयों, आवासीय परिसरों, निजी कॉलोनियों, अस्पतालों, स्कूलों, व्यावसायिक भवनों और औद्योगिक इकाइयों में रेन वाटर हावेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाया जाए।

शहर में 50 हजार बड़े मकान, सिर्फ 3717 में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

नगर निगम सीमा में कुल 1 लाख 29 हजार 9 मकान दर्ज हैं। नियम के मुताबिक 150 वर्गमीटर यानी करीब 1600 वर्गफीट से बड़े भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जरूरी है। शहर में ऐसे करीब 50 हजार मकान हैं। लेकिन, अब तक सिर्फ 3717 भवनों में ही सिस्टम लगाया गया है।

सरकारी भवनों की हालत भी खराब है। साल 2011 के बाद बने भवनों में केवल 254 शासकीय भवनों में ही वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम मौजूद है। साल 2019 से अब तक 1550 भवन मालिकों ने अनुमति ली, लेकिन सिर्फ 806 में ही सिस्टम बनाया गया। इनमें एक भी सरकारी भवन शामिल नहीं है।

निगम के पास जमा है 10.79 करोड़ से अधिक राशि

निगम रिकॉर्ड के अनुसार, 2019-20 से अब तक 1.55 करोड़ रुपए भवन मालिकों को लौटाए गए हैं, जिन्होंने रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया है। जबकि, 10 करोड़ 79 लाख 43 हजार रुपए अब भी निगम खाते में जमा हैं।

प्रावधान के अनुसार यह राशि तभी लौटाई जाती है, जब भवन मालिक पूर्णता प्रमाण पत्र जमा करते हैं। इसमें उन्हें यह बताना होता है कि उन्होंने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया है