उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, डीआरआई और छत्तीसगढ़-ओडिशा वन विभाग की संयुक्त टीम ने अंतरराज्यीय नारको-वाइल्डलाइफ तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है

Chhattisgarh Crimesउदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, डीआरआई और छत्तीसगढ़-ओडिशा वन विभाग की संयुक्त टीम ने अंतरराज्यीय नारको-वाइल्डलाइफ तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। संयुक्त टीम ने 3 दिनों के भीतर 3 बड़े ऑपरेशन चलाकर 79 किलो गांजा और 1.47 किलो प्रतिबंधित पैंगोलिन स्केल्प जब्त किए हैं।

मामले में 8 तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन ने बताया कि 10 सितंबर को यूएसटीआर की बोराई जांच चौकी पर ओडिशा से आ रही एक संदिग्ध बाइक को रोका गया। तलाशी में 31 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। आरोपी बाइक छोड़कर फरार हो गए। जब्त माल धमतरी पुलिस को सौंपा गया है। इसी इनपुट के आधार पर 11 सितंबर को ओडिशा के नबरंगपुर में घेराबंदी की गई।

यहां ड्रोन और डॉग स्क्वाड की मदद से 48 किलो गांजा और स्कूटी के साथ 2 पेडलर, प्रहलाद हरिजन और बिमल माझी, को गिरफ्तार किया गया। पकड़े गए पेडलर्स से मिले सुराग के बाद टीम ने मलकानगिरी के गोविंदपल्ली में दबिश दी।

यहां से 1.47 किलो पैंगोलिन स्केल्प, 3 बाइक और 5 मोबाइल जब्त किए गए। मामले में 6 आरोपी रामा कृष्ण गडबा (35), पूर्णा भूमिया (30), ईश्वर भूमिया (24), कुमा बिसोई (31), सभी मलकानगिरी, सुशांत खिल्ला (25) और लक्ष्मण सिलपड़िया (23), दोनों कोरापुट, को गिरफ्तार कर रिमांड पर भेजा गया।

नारकोटिक्स और वन्यजीव अंगों की हो रही अदला-बदली

जांच में खुलासा हुआ है कि नेटवर्क के बीच नारकोटिक्स और वन्यजीव अंगों का बार्टर ट्रेड (अदला-बदली) चल रहा था। यूएसटीआर प्रबंधन ने साफ किया है कि वन्यजीव कॉरिडोर को तस्करों का ट्रांजिट रूट नहीं बनने दिया जाएगा।

अब पुलिस, डीआरआई, डब्ल्यूसीसीबी और वन विभाग मिलकर छत्तीसगढ़-ओडिशा-महाराष्ट्र बॉर्डर पर एक्टिव इस पूरे सिंडिकेट को तोड़ने में जुटे हैं। प्रतिबंधित पैंगोलिन स्केल्प व पैंगोलिन तस्करी के कई अहम सुराग मिले हैं।