छत्तीसगढ़ में अवैध शराब का कारोबार नया नहीं है, लेकिन 2026 में इसके नए तरीके सामने आए हैं। अब दूसरे राज्यों की शराब सिर्फ यहां लाकर नहीं बेची जा रही, बल्कि उसकी पहचान बदलने की कोशिश भी की जा रही है।
जनवरी से सितंबर के बीच राजनांदगांव, डोंगरगढ़, कबीरधाम, महासमुंद, कांकेर, मोहला और सूरजपुर समेत कई जगह कार्रवाई हुई। कहीं MP, हरियाणा और उत्तराखंड की शराब मिली, तो कहीं खाली बोतलें, ढक्कन, लेबल और नकली होलोग्राम बरामद हुए।
कुछ मामलों में दूसरे राज्यों की शराब पर छत्तीसगढ़ के लेबल और होलोग्राम लगाकर उसे यहां की शराब जैसा दिखाने की कोशिश सामने आई। इन मामलों से अवैध शराब के कारोबार में पैकिंग बदलकर पहचान छिपाने का तरीका सामने आता है।
पहले समझिए होलोग्राम का काम
शराब की बोतल पर लगा होलोग्राम उसकी पैकिंग और पहचान से जुड़ा सुरक्षा चिन्ह होता है। सरकारी व्यवस्था के तहत शराब की बोतलों के ढक्कन पर होलोग्राफिक स्टिकर लगाए जाते हैं। इसी वजह से अवैध शराब के कारोबार में नकली होलोग्राम और लेबल का इस्तेमाल महत्वपूर्ण हो जाता है।
दूसरे राज्य की शराब अगर उसी पैकिंग में बेची जाए तो उसकी पहचान आसानी से हो सकती है। लेकिन बोतल पर छत्तीसगढ़ का लेबल, ढक्कन और होलोग्राम लगा दिया जाए तो उसे यहां बिकने वाली शराब जैसा दिखाने की कोशिश की जा सकती है।