ड्रोन सर्वे में खुलासा – करका में 10 साल में 1.25 लाख पेड़ गायब, अतिक्रमण 22 से बढ़कर 102 हेक्टेयर हुआ
पूरन मेश्राम/मैनपुर। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) करका के जंगल में क्षतिग्रस्त साल वृक्षों को बचाने के लिए वन विभाग ने एक बड़ा वैज्ञानिक अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत लगभग 3,500 ऐसे पेड़ों का इलाज किया जाएगा, जिनकी छाल को चारों ओर से काट कर (Girdling) मारने की कोशिश की गई है। इससे पेड़ के तने में पोषक तत्वों का संचार रुक जाता है और पेड़ धीरे-धीरे सूख कर मर जाता है।इन पेड़ों को बचाने के लिए कर्नाटक से प्रसिद्ध वृक्ष संरक्षण विशेषज्ञ विजय निशांत जिन्हें ट्री डॉक्टर के नाम से जाना जाता है और जो प्रोजेक्ट वृक्ष फाउंडेशन से जुड़े हैं जो USTR पहुंँचे हैं।
ड्रोन और सैटेलाइट ने खोली पोल
ड्रोन सर्वेक्षण और उपग्रह चित्रों के तुलनात्मक विश्लेषण में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। पिछले एक दशक में करका क्षेत्र में 1.25 लाख से अधिक वृक्ष नष्ट किए गए हैं। वहीं अतिक्रमण भी तेजी से बढ़ा है – वर्ष 2016 में जो 22 हेक्टेयर था, वह 2026 में बढ़कर 102.47 हेक्टेयर तक पहुंँच गया है।
3500 पेड़ों को 4 श्रेणियों में बांटा गया
विजय निशांत के मार्गदर्शन में इन पेड़ों को उनकी स्थिति के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा गया है।
तत्काल उपचार वाले पेड़ जिन्हें बचाने के लिए तुरंत बी-वैक्सिंग और ट्री बैंडेजिंग की जरूरत है।
50-75% बचने की संभावना वाले जिनमें ब्रिज ग्राफ्टिंग सर्जरी से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
50% से कम संभावना वाले गंभीर रूप से घायल पेड़, जिन्हें बार-बार उपचार और निगरानी की जरूरत होगी।
मृत पेड़ जो पूरी तरह सूख चुके हैं, उन्हें हटाकर उनके ठूंठ से दोबारा कोंपल फूटने (Coppice) का प्रयास किया जाएगा।
कैसे होगा इलाज
विशेषज्ञों द्वारा ब्रिज ग्राफ्टिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें स्वस्थ पौध ऊतक से घायल हिस्से को जोड़ा जाता है। इसके अलावा मधुमक्खी के मोम, संतरे के तेल, जड़ों को मजबूत करने वाले रसायन और ग्रोथ हार्मोन का भी उपयोग किया जा रहा है।हर पेड़ का सर्वे कर उसे अलग नंबर दिया गया है। उसकी प्रजाति,आयु,गोलाई, क्षति की सीमा का वैज्ञानिक अभिलेखीकरण किया जा रहा है।
100 से अधिक वनकर्मी जुटे
इस अभियान में USTR के 100 से अधिक मैदानी वनकर्मियों के साथ-साथ नगरी जिला धमतरी से आए बागवानी विशेषज्ञ चंद्रप्रकाश साहू, बीरबल और ग्राफ्टिंग विशेषज्ञों की टीम भी काम कर रही है। इसका उद्देश्य सिर्फ पेड़ों का इलाज नहीं, बल्कि वनकर्मियों को भी प्रशिक्षित करना है।
वन विभाग ने बताया कि करका क्षेत्र पैरी नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र का हिस्सा है। जो आगे जाकर महानदी बनती है। इसलिए यहाँ के जंगल को बचाना जैव विविधता और जल संरक्षण दोनों के लिए जरूरी है।