
विसर्जन के बाद जब यह प्रतिमाएं मिट्टी में मिलेंगी तो इनमें मौजूद बीज अंकुरित होकर पौधे बनेंगे। यानी गणेश उत्सव के बाद भी इन प्रतिमाओं के जरिए हरियाली का संदेश लोगों तक पहुंचेगा।
10 बंदियों ने तैयार कीं प्रतिमाएं
इन गणेश प्रतिमाओं को जेल में बंद 10 बंदियों ने तैयार किया है। उन्होंने अपनी क्रिएटिविटी और मेहनत से अलग-अलग डिजाइन की मूर्तियां बनाई हैं। जेल प्रबंधन के मुताबिक, इस काम से बंदियों को नई स्किल सीखने और अपनी क्रिएटिविटी दिखाने का मौका मिला।यह काम बंदियों को सिर्फ काम से जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें पॉजिटिव सोच और समाज के लिए उपयोगी कामों से जोड़ने की कोशिश भी है।
मिट्टी की मूर्ति, प्राकृतिक रंग और बीज
इन प्रतिमाओं को तैयार करने में प्राकृतिक मिट्टी और रंगों का इस्तेमाल किया गया है। मूर्तियों में तुलसी समेत अलग-अलग पौधों के बीज डाले गए हैं। इसका मकसद गणेश उत्सव के दौरान होने वाले विसर्जन को पर्यावरण के लिहाज से बेहतर बनाना है।
जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री ने बताया कि बंदियों के लिए जेल में लगातार स्किल डेवलपमेंट और प्रोडक्शन से जुड़े काम कराए जा रहे हैं। इसी कड़ी में बीज वाली गणेश प्रतिमाएं तैयार की गई हैं।उन्होंने कहा कि इन प्रतिमाओं के जरिए यह संदेश देने की कोशिश है कि आस्था के साथ पर्यावरण की देखभाल भी की जा सकती है।