छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस एके प्रसाद ने 22 साल से संतान की चाह में इंतजार कर रहे दंपती को बड़ी राहत दी

Chhattisgarh Crimesछत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस एके प्रसाद ने 22 साल से संतान की चाह में इंतजार कर रहे दंपती को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पत्नी तय उम्र की सीमा में है और डॉक्टरों के मुताबिक IVF के लिए फिट है, तो सिर्फ पति की ज्यादा उम्र के कारण उसे इलाज से मना नहीं किया जा सकता।

मामले में कोर्ट ने 47 साल की पत्नी को IVF इलाज कराने की मंजूरी दे दी है। दरअसल, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के रहने वाले दंपती की शादी को करीब 22 साल हो चुके हैं, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं है।

पत्नी की उम्र करीब 47 साल और पति की उम्र 57 साल है। दंपति ने इलाज के बाद डॉक्टरों की सलाह पर सेरोगेसी बोर्ड से अनुमति मांगी थी, लेकिन पति की उम्र ज्यादा होने के कारण संबंधित अधिकारियों ने आवेदन खारिज कर दिया था, जिसके बाद पति-पत्नी हाईकोर्ट पहुंचे।

जांच में IVF के लिए योग्य पाए गए थे दंपति

पत्नी ने 2013 में IUI उपचार कराया था, लेकिन इससे उन्हें संतान नहीं हुई। इसके बाद साल 2015 में वह गर्भवती हुईं, लेकिन करीब 4 महीने बाद गर्भपात हो गया। इसके बाद दंपती IVF इलाज के लिए रायपुर के आयुष टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर पहुंचे। जांच और डॉक्टरों से सलाह के बाद सेंटर ने उन्हें IVF के लिए योग्य पाया।

पति की उम्र 55 से ज्यादा होने पर नहीं मिली अनुमति

दंपती ने 24 जून 2026 को सेरोगेसी बोर्ड के संबंधित अधिकारी से IVF इलाज की अनुमति मांगी थी, लेकिन 31 जुलाई 2026 को उनकी मांग यह कहते हुए खारिज कर दी गई कि पति की उम्र 57 साल है। एआरटी एक्ट की धारा 21(जी)(ii) के मुताबिक पुरुष की अधिकतम उम्र 55 साल तय है। इसके बाद दंपती ने IVF उपचार की अनुमति के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

कानून में पति-पत्नी की संयुक्त उम्र की शर्त नहीं

हाईकोर्ट ने कहा कि कानून में ऐसी कोई शर्त नहीं है, जिसमें पति-पत्नी की उम्र जोड़कर दोनों को IVF के लिए अयोग्य माना जाए। कोर्ट ने कहा कि 47 साल की पत्नी तय उम्र सीमा में हैं और जांच में IVF के लिए सही पाई गई हैं। ऐसे में सिर्फ पति की उम्र 57 साल होने से पत्नी की IVF के लिए पात्रता खत्म नहीं हो जाती।

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