पर्यटन और संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि कोयला खदानों की वजह से ऐतिहासिक रामगढ़ को किसी तरह का खतरा हुआ तो कोयला उत्खनन बंद करा दिया जाएगा

Chhattisgarh Crimesपर्यटन और संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि कोयला खदानों की वजह से ऐतिहासिक रामगढ़ को किसी तरह का खतरा हुआ तो कोयला उत्खनन बंद करा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि चाहे कोई भी कंपनी या एजेंसी कोयला निकाल रही हो।

पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राजेश अग्रवाल ने कहा कि जिस समय कोल ब्लॉक को मंजूरी मिली थी, उस समय टीएस सिंहदेव विधायक थे और केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी।

दरअसल, टीएस सिंहदेव ने रामगढ़ से सटे हसदेव के जंगल में कोल ब्लॉक में हो रही ब्लास्टिंग के कारण रामगढ़ पहाड़ी की दरकने और लैंड स्लाइडिंग पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे रामगढ़ पर्वत पर खतरा मंडरा रहा है।

रामगढ़ महोत्सव की तैयारियों की समीक्षा

राजेश अग्रवाल ने बुधवार को रामगढ़ महोत्सव की तैयारियों को लेकर अधिकारियों की बैठक ली। आषाढ़ माह के प्रथम दिवस पर रामगढ़ के प्राचीन ऐतिहासिक स्थल में 29 और 30 जून को भव्य रामगढ़ महोत्सव का आयोजन होगा।

बैठक में महोत्सव के लिए जरूरी व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारियों की जानकारी ली गई। स्थानीय कलाकारों को मंच देने पर खास जोर दिया गया। महोत्सव में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए बस सेवा उपलब्ध कराने का सुझाव भी रखा गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रहेगी धूम

मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि प्राकृतिक संपदा और ऐतिहासिक-धार्मिक महत्व से समृद्ध रामगढ़ में इस साल भी गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव रामगढ़ महोत्सव के रूप में मनाया जाएगा।

महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम, राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी, विद्यालयीन प्रस्तुतियां, कवि सम्मेलन, शास्त्रीय नृत्य और संगीत की आकर्षक प्रस्तुतियां आयोजित होंगी।

विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में पहचान

राजेश अग्रवाल ने कहा कि रामगढ़ विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में अपनी अलग पहचान रखता है। यह स्थल आस्था, संस्कृति, नाट्य परंपरा और पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।

रामगढ़ पहाड़ी और उनके महत्व बारे में जानिए

उदयपुर विकासखंड मुख्यालय के समीप स्थित रामगढ़ पहाड़ी दूर से देखने पर मानो किसी विशाल हाथी की आकृति सी प्रतीत होती है। समुद्र तल से लगभग 3,202 फीट ऊंची यह पहाड़ी अपने प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी अद्वितीय पहचान रखती है।

महाकवि कालिदास की अमर कृति ‘मेघदूतम्’ की रचना-स्थली मानी जाने वाली इस पर्वत श्रृंखला की गोद में विश्व की सबसे प्राचीन शैल नाट्यशाला बसी है। इसकी महत्ता को जीवित रखने के लिए हर वर्ष आषाढ़ मास के पहले दिन यहां भव्य रामगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाता है, जिसमें कला, संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

रामगढ़ पर्वत के निचले शिखर पर स्थित सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाएं भारतीय स्थापत्य और नाट्य कला की धरोहर हैं। इतिहासकार मानते हैं कि ये गुफाएं तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व, मौर्यकालीन युग की हैं और इन्हें विश्व की सबसे प्राचीन शैल नाट्यशालाओं के रूप में मान्यता प्राप्त है।

गुफाओं के भीतर की संरचना इस बात की गवाही देती है कि यहां नाट्य और सांस्कृतिक आयोजनों की परंपरा प्राचीन काल से रही है। जोगीमारा गुफा अपने भित्ति चित्रों और मौर्यकालीन ब्राह्मी लिपि में लिखित अभिलेखों के लिए प्रसिद्ध है।

वहीं, सीताबेंगरा गुफा में गुप्तकालीन ब्राह्मी लिपि के अभिलेख पाए जाते हैं, जो भारतीय इतिहास और साहित्य को अमूल्य प्रमाण उपलब्ध कराते हैं। इन शिलालेखों और चित्रों की वजह से रामगढ़ न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि संपूर्ण भारत की सांस्कृतिक अस्मिता का जीवंत प्रतीक माना जाता है।

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