युमेन्द्र कश्यप/गरियाबंद। पीवी ऐप की तकनीकी एवं व्यावहारिक समस्याओं, कथित दमनात्मक निलंबन और स्थानांतरण की कार्रवाई, वेतन विसंगति तथा पदोन्नति की मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ राजस्व पटवारी संघ ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। संघ के प्रांतीय आह्वान पर पिछले 13 अक्टूबर से पटवारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दिया है। पटवारियों के इस आंदोलन से जिले की राजस्व व्यवस्था पर भारी असर पड़ने लगा है। वही, किसानों और आम नागरिकों को भी अपने राजस्व संबंधी कार्यों के लिए भटकना पड़ रहा है। राजस्व पटवारी संघ ने अपनी मांगों को लेकर स्पष्ट रुख अपनाते हुए चार प्रमुख मुद्दे उठाए हैं। इनमें पीवी ऐप में कार्य करने का बहिष्कार, दमनात्मक निलंबन एवं स्थानांतरण की कार्रवाई वापस लेना, वेतन विसंगति दूर करना और राजस्व निरीक्षक के पद पर विभागीय पदोन्नति सुनिश्चित करना शामिल है।
संघ का कहना है कि पीवी ऐप के माध्यम से फसलों के भौतिक सत्यापन के दौरान विभिन्न तकनीकी एवं व्यावहारिक समस्याएं सामने आ रही हैं। इन कठिनाइयों से विभाग और शासन को अवगत कराने के बावजूद समाधान नहीं होने से पटवारियों में असंतोष बढ़ा है। संघ ने लंबित मांगों पर ठोस निर्णय लेने और कर्मचारियों से जुड़ी समस्याओं का निराकरण करने की मांग की है। राजस्व पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष गुलशन यदु, लवकुमार साहू, तुलेश कोमर्रा, भागवत कश्यप, मनोज खरे, धनेश ध्रुव, नरेश ध्रुव, टंकेश्वर वर्मा, उषाकिरण साहू, आशीष चतुर्वेदी, रायसिंग ठाकुर, राकेश साहू, ब्रम्ह मरकाम, रंजिता कश्यप, प्रेमेन्द्र साहू, खेमराज सेन, हेमंत सेन, लोकेश साहू, टीकाराम त्रिवेन्द्र, शिवकुमार ध्रुव, मनीष पारकर, मनोज कंवर, अजय बघेल, रामकृष्ण सिन्हा, देवन्ती ध्रुव, अंजली विभोर ने बताया अपनी लंबित मांगो को लेकर पिछले 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है।
पटवारियो के अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल पर चले जाने के कारण आम जनता और किसानों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं धान खरीदी और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसानों को समय पर ऋण पुस्तिका, खसरा, बी-वन और गिरदावली (फसल का रकबा) की आवश्यकता पड़ती है पटवारियों के काम पर नहीं लौटने से किसानों को अपने खेतों के दस्तावेजों के लिए तहसील कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, लेकिन वहां ताले लटके मिलने से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है खासकर धान खरीदी के सीजन के नजदीक आते ही किसानों की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं। केवल किसान ही नहीं, बल्कि आम नागरिक भी जाति, निवास, आय प्रमाण पत्र और नामांतरण, सीमांकन जैसे जरूरी कार्यों के लिए परेशान हो रहे हैं छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति के लिए प्रमाण पत्रों की सख्त जरूरत है, लेकिन पटवारी प्रतिवेदन (रिपोर्ट) न मिलने के कारण उनके आवेदन अटक गए हैं। आम जनता और किसानों ने शासन-प्रशासन से अपील की है कि वे पटवारियों की मांगों पर जल्द से जल्द विचार कर कोई सकारात्मक हल निकालें, ताकि ठप पड़े शासकीय कामकाज सुचारू रूप से शुरू हो सकें और जनता को इस बड़ी परेशानी से राहत मिल सके।