बालोद शहर के गंजपारा स्थित देशी शराब दुकान के पास कचरे से पटे सोख्ता गड्ढे में एक गाय गले तक धंस गई

Chhattisgarh Crimesबालोद शहर के गंजपारा स्थित देशी शराब दुकान के पास कचरे से पटे सोख्ता गड्ढे में एक गाय गले तक धंस गई। गाय करीब तीन घंटे तक बाहर निकलने के लिए छटपटाती रही।

इस दौरान शराब लेने पहुंचे लोगों की नजर उस पर पड़ी, जिसके बाद गौसेवक अजय यादव की टीम को सूचटीम ने मौके पर पहुंचकर करीब एक घंटे की मशक्कत की और JCB की मदद से गाय को गड्ढे से बाहर निकाला।गौसेवक अजय यादव के मुताबिक, गाय भोजन की तलाश में शराब दुकान के पास पहुंची थी। इसी दौरान वह सोख्ता गड्ढे में गिर गई। गड्ढे में कचरा भरा होने के कारण गाय बाहर नहीं निकल सकी और गले तक धंस गई। काफी देर तक छटपटाने के बाद भी जब वह बाहर नहीं निकल पाई, तब लोगों ने गौसेवकों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद टीम ने JCB की मदद से उसे बाहर निकाला।

शराब दुकानों के आसपास प्लास्टिक कचरे का ढेर

अजय यादव ने बताया कि बालोद शहर के तांदुला और गंजपारा स्थित दोनों शराब दुकानों के आसपास बड़ी मात्रा में कचरा बिखरा रहता है। सोख्ता गड्ढे और आसपास के हिस्से में डिस्पोजल गिलास, प्लास्टिक की शराब बोतलें, पानी के पाउच और चखना दुकानों से निकलने वाली पॉलीथिन समेत अन्य कचरा जमा है। इससे भोजन की तलाश में वहां पहुंचने वाले मवेशियों के बीमार पड़ने का खतरा बना रहता है।

सफाई की जिम्मेदारी किसकी, व्यवस्था पर सवाल

गंजपारा स्थित शराब दुकान के सामने नाली और सोख्ता गड्ढा प्लास्टिक कचरे से पटे पड़े हैं। शराब पीने के बाद लोग डिस्पोजल गिलास, प्लास्टिक की बोतलें और अन्य कचरा वहीं फेंक देते हैं। चखना दुकानों से निकलने वाली पॉलीथिन और पानी के पाउच भी आसपास जमा रहते हैं।

इसके बावजूद शराब दुकान के अहाता संचालक और आबकारी विभाग की ओर से परिसर के आसपास सफाई कराने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। विभाग शराब बिक्री से राजस्व वसूलता है, लेकिन दुकान के सामने फैली गंदगी और खुले गड्ढे की स्थिति बनी हुई है। इसी के बीच गाय के गड्ढे में गिरने की घटना सामने आई है।

गड्ढे को पाटने या चारों ओर घेरा बनाने की मांग

गौसेवक अजय यादव ने घटना के लिए आबकारी विभाग की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि सोख्ता गड्ढे को या तो पाट देना चाहिए था या उसके चारों ओर घेरा बनाया जाना चाहिए था, ताकि मवेशी उसमें न गिरें।

उन्होंने शराब दुकानों के आसपास जमा डिस्पोजल गिलास, प्लास्टिक बोतलों, पानी के पाउच और पॉलीथिन समेत अन्य कचरे की नियमित सफाई कराने तथा गड्ढे की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत बताई।