
अप्रैल 2015 में विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी, लेकिन अब तक यहां UTD शुरू नहीं हो पाया था। इस वजह से विश्वविद्यालय की भूमिका मुख्य रूप से परीक्षा कराने और परिणाम जारी करने तक ही सीमित रही। अब पहली बार विश्वविद्यालय अपने परिसर में सीधे पढ़ाई और शोध (रिसर्च) की शुरुआत करने जा रहा है।
कुलपति प्रो. संजय तिवारी ने बताया कि संस्थान का उद्देश्य केवल परीक्षाएं कराना नहीं है, बल्कि अब छात्रों को उच्च स्तरीय शिक्षा, शोध और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। प्री-पीएचडी परीक्षा शुरू हो चुकी है और आगे रिसर्च को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही मेरिट में आने वाले विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल भी दिया जाएगा।
कुलपति प्रो. तिवारी ने बताया कि विश्वविद्यालय ने जिन 5 विषयों का प्रस्ताव भेजा था, उन्हें मंजूरी मिल गई है। इनमें फिजिक्स, केमिस्ट्री, बॉटनी, जूलॉजी और मैथेमेटिक्स शामिल हैं। इन सभी विषयों में स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई जुलाई से शुरू होगी। इसके लिए नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। अब प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद कक्षाएं शुरू कर दी जाएंगी।
AICTE से 8 नए कोर्स को भी मिली मंजूरी
कुलपति ने बताया कि ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) से 8 नए प्रोफेशनल कोर्स की भी मंजूरी मिल चुकी है। इनमें एमबीए, एमसीए, फिनटेक जैसे कोर्स शामिल हैं।
इसके अलावा छत्तीसगढ़ सरकार के विजन डॉक्यूमेंट को ध्यान में रखते हुए सप्लाई चेन मैनेजमेंट, ब्लॉकचेन मैनेजमेंट और ट्रैवल एंड टूरिज्म जैसे रोजगार आधारित कोर्स भी शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
स्पेशल बीएड और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की भी तैयारी
कुलपति ने बताया कि रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (आरसीआई) से स्पेशल बीएड प्रोग्राम शुरू करने का प्रस्ताव अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि आज स्कूलों और दूसरे शैक्षणिक संस्थानों में स्पेशल बीएड प्रशिक्षित शिक्षकों की मांग लगातार बढ़ रही है।
केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय समेत कई संस्थानों में ऐसे शिक्षकों की जरूरत है। इसे देखते हुए विश्वविद्यालय सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्पेशल एजुकेशन भी शुरू करना चाहता है। राज्य सरकार से अनुमति मिलने के बाद इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
8 साल पहले स्वीकृत हुए थे 64 पद
यूटीडी शुरू करने की तैयारी नई नहीं है। करीब 8 साल पहले इसके लिए प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर समेत कुल 64 पदों को मंजूरी मिली थी। हालांकि किसी कारण से पूरी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी और यूटीडी शुरू नहीं हो पाया।
अब जब विश्वविद्यालय में पढ़ाई शुरू होने जा रही है, तो इन पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया भी दोबारा शुरू होने की उम्मीद है। इससे विश्वविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता भी साफ होगा।
नई बिल्डिंग का इंतजार अब भी जारी
विश्वविद्यालय की नई बिल्डिंग तैयार होने के बावजूद अब तक उसका लोकार्पण नहीं हो पाया है। ऐसे में शुरुआती दौर में पढ़ाई और प्रैक्टिकल को लेकर वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। कुलपति ने बताया कि इस संबंध में शासकीय वीवाईटी साइंस कॉलेज के साथ एमओयू किया गया है।
शुरुआती समय में कुछ प्रैक्टिकल यूनिवर्सिटी परिसर में कराए जाएंगे, जबकि जिन प्रयोगशालाओं की जरूरत होगी, वहां छात्रों को वीवाईटी साइंस कॉलेज समेत दूसरे सहयोगी कॉलेजों की लैब का उपयोग कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि रूसा योजना के तहत इन कॉलेजों में लैब की सुविधाओं को मजबूत किया गया है, जिसका लाभ छात्रों को मिलेगा।