
■ मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई
पुलिस के मुताबिक, मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर मैनपुर पुलिस ने राजाडेरा पहाड़ी के पास घेराबंदी की थी। इसी दौरान जंगल से एक बैग लेकर लौट रहे तीन संदिग्ध पुलिस को देखकर छिपने का प्रयास करने लगे। पुलिस टीम ने घेराबंदी कर तीनों को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उनके पास मौजूद काले रंग के बैग में टिफिन के भीतर 500-500 रुपए के नोटों के बंडल रखे मिले। गिनती करने पर कुल 21 लाख रुपए नकद बरामद हुए।
■ आरोपियों की पहचान और पृष्ठभूमि
पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:
सिंगे उर्फ रोशनी (25): निवासी ग्राम गामगुलावर, जिला सुकमा। यह नक्सली कमांडर चलपति की गार्ड रह चुकी है।
बुधरी मुचाकी उर्फ बुधरी उर्फ सोनी (35): निवासी ग्राम एटेगट्टा, जिला सुकमा। इसे सीनापाली दलम की पूर्व कमांडर बताया गया है।
नोहर मरकाम (36): निवासी ग्राम भुतबेडा, थाना मैनपुर, जिला गरियाबंद। इसे नक्सलियों का सहयोगी बताया गया है।
■ 2024 में जंगल में दबाकर रखा गया था डंप
पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि बरामद 21 लाख रुपए ठेकेदारों और आम लोगों को डराने-धमकाने के बाद अवैध वसूली के जरिए जुटाए गए थे। पुलिस के अनुसार, वर्ष 2024 में नक्सली कमांडर चलपति ने इस रकम को राजाडेरा जंगल में पहाड़ी के पास जमीन के अंदर छिपाकर रखा था। लंबे समय से छिपाई गई इस रकम को निकालने के लिए सुकमा पुनर्वास कैंप में रहने के दौरान दोनों महिला आरोपियों ने अपने पुराने सहयोगी नोहर मरकाम से संपर्क किया और उसके साथ राजाडेरा जंगल पहुंची थीं।
■ पुनर्वास के बाद भी नक्सली गतिविधियों से जुड़े रहने का आरोप
पुलिस का दावा है कि दोनों महिला आरोपियों ने शासन की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण किया था, लेकिन उनका उद्देश्य जंगल में छिपाकर रखे गए नक्सली संगठन के पैसे को निकालकर दोबारा संगठन की गतिविधियों में इस्तेमाल करना था। इसी योजना के तहत तीनों राजाडेरा जंगल पहुंचे थे, हालांकि पुलिस की कार्रवाई में वे रकम लेकर लौटते समय पकड़े गए।
■ BNS और UAPA के तहत मामला दर्ज
पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2), 61(2) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 17, 18, 20, 38 और 40 के तहत देहाती नालसी दर्ज कर आगे की विवेचना शुरू कर दी है। मामले में बरामद नकदी, मोबाइल फोन और मोटरसाइकिल को भी जब्त किया गया है। इस कार्रवाई के बाद आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों की गतिविधियों और पुनर्वास प्रक्रिया की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, और पुलिस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।