छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला अस्पताल में सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित युवती दीपिका गाड़ा की मौत

Chhattisgarh Crimesछत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला अस्पताल में सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित युवती दीपिका गाड़ा की मौत के मामले में दो लैब टेक्नीशियन और दो स्टाफ नर्स समेत चार संविदा कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई।

स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट आने के बाद यह कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि फीमेल वार्ड से ब्लड बैंक की दूरी सिर्फ 30 से 40 कदम थी। इसके बावजूद ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों ने खुद ब्लड बैंक जाकर मरीज के लिए खून लाने की कोई कोशिश नहीं की।

जांच अधिकारियों ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए लिखा कि कर्मचारियों ने इस दिशा में कोई रुचि नहीं दिखाई। इसी आधार पर दो लैब टेक्नीशियन और दो स्टाफ नर्स समेत चार संविदा कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं।

इस मामले में प्रशासन की ओर से बनाई गई दो सदस्यीय जांच टीम की रिपोर्ट में 9 कर्मचारियों की सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदारी तय की गई थी।हालांकि इसी रिपोर्ट के बाद यह सवाल भी उठ रहे हैं कि जब ब्लड बैंक इतनी कम दूरी पर था, तब वहां मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी क्यों तय नहीं की गई। इस पूरे मामले में छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि बड़े जिम्मेदार अफसरों को बचाया जा रहा है।

दुर्ग के जिला अस्पताल में सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित 20 साल की युवती दीपिका गाड़ा की खून नहीं मिलने से हुई मौत के मामले में 25 दिन बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की है। जांच के बाद 2 डॉक्टर समेत कुल 7 कर्मचारियों को जिम्मेदार माना गया है।

इनमें 4 संविदा कर्मचारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई हैं, जबकि 3 नियमित और संविदा कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए उनके नियुक्तिकर्ता को पत्र भेजा गया है। हालांकि इस कार्रवाई के बाद भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि ब्लड बैंक में 85 यूनिट खून उपलब्ध था, फिर भी गंभीर हालत में भर्ती मरीज को एक यूनिट खून तक नहीं मिल सका। इसके बावजूद ब्लड बैंक और अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई सीधी कार्रवाई नहीं हुई।

4 संविदा कर्मचारियों की सेवा समाप्त

दुर्ग के जिला कलेक्टर अभिजीत सिंह के अनुसार, रेडक्रॉस सोसायटी से नियुक्त लैब टेक्नीशियन तरन्नुम जहां और निगार परवीन की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। साथ ही एनएचएम की स्टाफ नर्स जागेश्वरी देवी और तनुजा चंद्राकर को भी नौकरी से हटा दिया गया है।

इसके अलावा नियमित स्टाफ नर्स अनसतसिया केरकेट्टा, पीजी रेजिडेंट डॉक्टर निखिल अग्रवाल और एनएचएम की विशेषज्ञ डॉक्टर डॉ. तृप्ति तिवारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए उनके नियुक्तिकर्ता को पत्र भेजा गया है।

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