उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में अवैध शिकार पर कब लगेगी लगाम

Chhattisgarh Crimesपूरन मेश्राम/मैनपुर।उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व छत्तीसगढ़ की शान है, जंगल की धरोहर है। लेकिन चिंता की बात यह है कि इस रिजर्व क्षेत्र में आए दिन अवैध शिकार की घटनाएं सामने आ रही हैं। पोटाश बम लगाकर जंगली सुअर जैसे वन्य प्राणियों की जान ली जा रही है।वन विभाग इस पर पैनी नजर रखे हुए है और लगातार कार्यवाही करते हुए आरोपियों को जेल की सलाखों के पीछे भी डाल रहा है। अभी हाल ही में रिसगांव परिक्षेत्र के चिखलापानी में पोटाश बम से शिकार के मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है, यह विभाग की सजगता को दिखाता है। विभाग की इस कार्यवाही की सराहना होनी चाहिए।लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह सिलसिला थम क्यों नहीं रहा। वन्य प्राणी जंगल की आत्मा हैं। अगर हम इसी तरह उनका शिकार करते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब जंगल तो रहेगा, पर उसमें जीवन नहीं बचेगा। यह सिर्फ वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है।इस पर अब क्षेत्र की जनप्रतिनिधि समितियों,ग्राम सभाओं और जल-जंगल-जमीन बचाओ संघर्ष समिति जैसी सामाजिक समितियों को भी स्वतः संज्ञान लेने की जरूरत है। ग्रामीणों को समझाना होगा कि शिकार करना सिर्फ कानूनन अपराध ही नहीं, बल्कि अपने ही घर को उजाड़ने जैसा है।वन विभाग और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय,जागरूकता अभियान और पोटाश बम जैसी विस्फोटक सामग्री की सप्लाई चेन पर कठोर प्रहार ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है। जंगल बचेगा, तभी हम बचेंगे।

Exit mobile version