
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने सड़क पर बैठकर भोजन किया। पुलिस ने उन्हें हटाने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि पहले उनके घर तोड़ दिए गए, अब खाना भी नहीं खाने दिया जा रहा है।
इससे पहले ग्रामीणों ने मंत्री ओपी चौधरी के बंगले का घेराव किया था। वहीं, बुलडोजर कार्रवाई के बाद कई परिवार अपने टूटे हुए मकानों में बारिश और कीचड़ के बीच भी धरने पर बैठे रहे। इससे पहले वे रायपुर कलेक्ट्रेट के सामने भी प्रदर्शन कर चुके हैं और लगातार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
प्रशासन को 5 दिन का अल्टीमेटम
ग्रामीणों ने कहा कि उनकी जमीन वापस चाहिए। तोड़े गए घरों का मुआवजा दें और लोगों पर की गई FIR वापस ली जाए। कलेक्टर ने 10 महिलाओं को मिलने बुलाया। इस दौरान उन्होंने अपनी मांग रखी। कलेक्टर ने ऊपर तक मांग पहुंचाने की बात कही।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सुनवाई नहीं हुई तो राज्यपाल के पास जाएंगे। वहां भी सुनवाई नहीं हुई तो छत्तीसगढ़ में बंद बुलाया जाएगा। 5 दिन का अल्टीमेटम देकर ग्रामीण रवाना हुए।
85 घर पर चला था बुलडोजर
3 दिन पहले नकटी गांव में 85 घरों पर बुलडोजर चला दिया गया था। बता दें कि प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को EWS मकान दिए हैं, लेकिन सभी को आवास नहीं मिला है। वहीं हाउसिंग बोर्ड का दावा है कि गांव के 77 लोगों ने 15 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा किया था।