
शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि इसी डिजिटल अटेंडेंस के आधार पर वेतन का भुगतान होगा। यानी जिस दिन शिक्षक की अटेंडेंस ऐप में दर्ज नहीं होगी या समय पर पंच-इन-पंच-आउट नहीं हो पाएगा, उस दिन के वेतन पर असर पड़ सकता है।
लेकिन ये व्यवस्था अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। प्रदेश के शिक्षकों ने नई व्यवस्था का विरोध किया है। शिक्षकों के ग्रुप का एक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें शिक्षक खुद नौका चलाकर उफनती नदी पार कर रहे हैं।
इसी दौरान शिक्षक नई व्यवस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में वीएसके ऐप के जरिए व्यवस्था कैसे संभलेगी। शिक्षकों का आरोप है कि ऐप में न तो लोकेशन सही दिखती है और न ही टाइमिंग ठीक दर्ज होती है।वहीं, प्रदेश के कई स्कूलों में नेटवर्क की समस्या के कारण उपस्थिति दर्ज करने में भी दिक्कत आ रही है। ऐसे में शिक्षक संगठनों ने भी मामले पर आवाज उठाते हुए 7 अगस्त को आंदोलन की चेतावनी दी है।
ऐप की तकनीकी खामियों पर सवाल
शिक्षक संगठनों का कहना है कि ऐप की तकनीकी खामियों के कारण शिक्षकों की उपस्थिति सही तरीके से दर्ज नहीं हो पा रही है। ऐसे में केवल ऐप के रिकॉर्ड के आधार पर वेतन रोकना या कटौती करना उचित नहीं होगा।
संगठन बोला- सिस्टम की गलती पर शिक्षकों को सजा गलत
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा और छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे का कहना है कि शिक्षक रोज स्कूल पहुंचकर पढ़ाई करा रहे हैं, लेकिन ऐप की तकनीकी दिक्कतों के कारण उनकी पूरी अटेंडेंस रिकॉर्ड नहीं हो रही। ऐसे में गलती सिस्टम की है, शिक्षक की नहीं।