
अभनपुर में चल रहे कांग्रेस के 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर से जिला अध्यक्षों के लिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश निकलकर आया है। कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने साफ कर दिया है कि जिला अध्यक्ष बन जाना ही मंजिल नहीं है, असली परीक्षा अब शुरू होगी। संगठन उनके कामकाज पर नजर रखेगा और खराब प्रदर्शन करने वालों को पद से हटाया भी जा सकता है। जानकारी के मुताबिक, प्रशिक्षण शिविर में वेणुगोपाल ने जिला अध्यक्षों से कहा कि संगठन सृजन अभियान के तहत हुई नियुक्तियां स्थायी नहीं हैं। अगले छह महीने तक हर जिलाध्यक्ष के काम, सक्रियता, जनसंपर्क, संगठन विस्तार और बूथ स्तर पर प्रदर्शन की समीक्षा होगी। जो अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरेंगे, उनके स्थान पर नए चेहरे लाए जा सकते हैं। दरअसल, 41 नए जिला कांग्रेस अध्यक्षों की नियुक्ति के समय ही कांग्रेस नेतृत्व ने परफॉर्मेंस आधारित मॉडल तय किया था। अब रायपुर शिविर में उसे सार्वजनिक रूप से दोहराया गया है। संगठन के भीतर इसे “वर्क ऑर आउट” फॉर्मूला माना जा रहा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी अब केवल गुटीय संतुलन के आधार पर संगठन नहीं चलाना चाहती, बल्कि मैदान में सक्रिय नेताओं को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही है। यही वजह है कि जिलाध्यक्षों को गांवों में भेजा जा रहा है, उनसे जनसंवाद कराया जा रहा है और जमीनी रिपोर्ट तैयार करवाई जा रही है।