
जानकारी के मुताबिक, अंबिकापुर के खरसिया रोड स्थित शंकर ट्रेडर्स में सोमवार को दो ट्रक यूरिया आने के बावजूद किसानों को यूरिया नहीं देने की शिकायत मिलने पर कृषि विभाग, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने छापा मारा। दुकान के बाहर “यूरिया नहीं है” लिखा हुआ स्टिकर चिपकाया गया था, लेकिन जब टीम ने गोदाम की जांच की, तो वहां से 37 बोरी यूरिया मिला।
कृषि उप संचालक पितांबर सिंह दीवान ने बताया कि यूरिया को जब्त कर लिया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।
सुबह पहुंचा दो ट्रक यूरिया, पिकअप से भेजा गया बाहर नियमों के मुताबिक, जब भी यूरिया की खेप आती है, तो उसकी एंट्री POS मशीन से की जाती है और उसके बाद ही किसानों को वितरण किया जाता है।
बताया गया है कि सोमवार को ट्रेडिंग कंपनी में सुबह 6 बजे और फिर 11 बजे दो ट्रकों से यूरिया पहुंचा था। शिकायत है कि यूरिया को दुकान में रखने के बजाय सामने खड़ी पिकअप गाड़ी में लोडकर सीधे बाहर भेज दिया गया।
इस पूरे मामले में आरोप है कि मौके पर पहुंचे कृषि विभाग के अधिकारियों ने स्थिति की ठीक से जांच नहीं की और सिर्फ खानापूर्ति कर लौट गए।
1000 रुपए बोरी तक में मिल रहा यूरिया सरगुजा की सहकारी समितियों में यूरिया का स्टॉक नहीं है। किसानों का कहना है कि जो यूरिया उन्हें 266 रुपए प्रति बोरी मिलना चाहिए, वही अब 800 से 1000 रुपए तक में ब्लैक में बेचा जा रहा है।
धान की फसल में इस समय यूरिया की सबसे ज़्यादा जरूरत होती है, इसलिए किसान मजबूरी में चार गुना कीमत पर यूरिया खरीदने को मजबूर हैं।
कंपनी से सीधे निजी क्षेत्रों को सप्लाई यूरिया बनाने वाली कंपनियां अब रेक की जगह ट्रकों से सीधे निजी दुकानदारों और ट्रेडिंग सेंटरों को यूरिया सप्लाई कर रही हैं। इसके साथ ही उन्हें अन्य प्रोडक्ट लेने पर भी मजबूर किया जा रहा है। सरकारी क्षेत्र में यूरिया की कोई सप्लाई नहीं हो रही है। वहीं, धान की फसल में बाढ़ आ चुकी है और किसान अपनी फसल बचाने के लिए महंगे दामों पर यूरिया खरीदने को मजबूर हैं।
यूरिया लेने पहुंचे किसान लौटे निराश नान दमाली से आए किसान कमलेश्वर खलखो ने बताया कि यूरिया मिलने की सूचना मिलने पर आए थे। यूरिया नहीं मिलने से बहुत ज्यादा दिक्कत है। यूरिया की किल्लत से धान मर रहे हैं। जितने सोसाइटी में यूरिया मिलता है, वे जा चुके हैं, लेकिन यूरिया कहीं भी नहीं है।
किसान गेंदाराम टोप्पो ने बताया कि बिचौलिए यूरिया रखे हुए हैं और किसानों को 1500 रुपए तक में बेच रहे हैं। यूरिया कहीं भी सोसाइटी में नहीं है। किसानों का धान बर्बाद होने की स्थिति में है। इससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।