
हालांकि ये जरूर कहा गया है कि त्रुटि सुधार की राशि यूनिवर्सिटी बच्चों से नहीं वसूलेगी। इस बीच पूरे मामले को लेकर NSUI के कार्यकर्ताओं ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। अनोखा विरोध प्रदर्शन करते हुए NSUI के कार्यकर्ता यूनिवर्सिटी के कुलपति और रजिस्ट्रार को ABCD सिखाने प्रशासनिक भवन पहुंचे।
यूनिवर्सिटी के गेट के बाहर प्रदर्शन
यूनिवर्सिटी के एंट्रेस ग्रेट पर ही NSUI कार्यकर्ताओं को रोक दिया गया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने बाहर ही क्लास लगा दी। प्रतीकात्मक तौर पर कुलपति-रजिस्ट्रार खड़े किए गए और ABCD पढ़ाना शुरू किया गया। करीब आधे घंटे ये क्लास चली। इस दौरान क्लास ले रहे मास्टर ने कुलपति-रजिस्ट्रार को जमकर फटकार लगाई।
NSUI का आरोप – भ्रष्टाचार करने के लिए की गई गलती
NSUI के वाइस चेयरमैन पुनेश्वर लहरे ने बताया कि यूनिवर्सिटी के पास खुद का प्रिंटिंग प्रेस है, लेकिन यहां मार्कशीट प्रिंट नहीं होती। मार्कशीट क्या यूनिवर्सिटी का एक कागज तक प्रिंट नहीं होता।
बाहर से मार्कशीट प्रिंट कराई गई है। अब इसे सुधारने का खर्च विश्वविद्यालय अपनी ओर से भी लगाता है तो भी पैसा तो बच्चों का ही लगेगा। ये सबकुछ भ्रष्टाचार करने के लिए किया गया है।
मार्कशीट में सुधार की राशि 120 से बढ़ाकर 500 की गई
NSUI ने इस बात को लेकर भी अपना विरोध दर्ज कराया कि यूनिवर्सिटी ने मार्कशीट में त्रुटि सुधार शुल्क को ₹120 से बढ़ाकर ₹500 कर दिया है। कार्यकर्ताओं ने कहा ये निर्णय पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और छात्र-विरोधी है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार के छात्रों पर यह अतिरिक्त बोझ डालना न्यायसंगत नहीं है।