
जिन पार्टियों की मान्यता खतरे में है, उनमें भारत भूमि पार्टी, भारतीय जनता सेक्युलर पार्टी, भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा, छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच, छत्तीसगढ़ विकास गंगा राष्ट्रीय पार्टी, छत्तीसगढ़ समाज पार्टी, छत्तीसगढ़िया पार्टी, पिछड़ा समाज पार्टी यूनाइटेड और राष्ट्रीय गोंडवाना पार्टी शामिल हैं।
चुनाव खर्च की रिपोर्ट जमा नहीं कर पाए कई राजनीतिक दल
इन सभी दलों पर आरोप है कि इन्होंने वित्तीय वर्ष 2021-22, 2022-23 और 2023-24 के लिए अपने लेखा परीक्षित वार्षिक खातों को निर्धारित समय सीमा – यानी 30 नवंबर 2022, 31 दिसंबर 2023 और 15 दिसंबर 2024 तक जमा नहीं किया।
इसके अलावा, इन्होंने विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भाग लेने के बावजूद चुनावी खर्च की रिपोर्ट भी तय सीमा (75 दिनों व 90 दिनों) के अंदर नहीं दी।
चुनाव आयोग ने पार्टियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया
चुनाव आयोग ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29ए और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए इन पार्टियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। आयोग ने 9 अक्टूबर 2025 को सुनवाई भी रखी, जिसमें कुछ दलों की ओर से कोई जवाब नहीं आया।
अब मामला केंद्रीय निर्वाचन आयोग को भेजा गया है, जो एक महीने के अंदर तय करेगा कि इन पार्टियों की मान्यता बरकरार रहेगी या इन्हें पंजीकृत दलों की सूची से हटाया जाएगा।
क्या कहता है नियम?
धारा 29ए के मुताबिक, कोई भी पंजीकृत राजनीतिक दल यदि सालाना ऑडिट रिपोर्ट और चुनावी खर्च का ब्यौरा समय पर जमा नहीं करता, तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है। यह पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है।