
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, निलंबन अवधि के लिए उनका मुख्यालय संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास, दुर्ग निर्धारित किया गया है।
जांच में सामने आया कि 2023 में जिन बोलीकर्ताओं ने दुकानों की ऊंची बोली लगाने के बावजूद राशि जमा नहीं की थी, उन्हें 2025 की नीलामी में फिर से पात्र मान लिया गया।
इन बोलीकर्ताओं को दुकानें कम दरों पर आवंटित की गईं, जिससे नगर पालिका को लगभग 65 लाख रुपए का राजस्व नुकसान हुआ। यह कार्रवाई नीलामी नियमों और वित्तीय पारदर्शिता का सीधा उल्लंघन था।
बकायेदारों को दोबारा मौका देकर लाभ पहुंचाया गया
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कई दुकानों की कीमतें 2023 की नीलामी की तुलना में जानबूझकर 40 से 60 प्रतिशत तक कम कर दी गई थीं। नियमों के अनुसार, पहली नीलामी में राशि जमा न करने वाले बोलीकर्ता स्वतः अयोग्य हो जाते हैं,
लेकिन पुराने बकायेदारों को दोबारा मौका देकर उन्हें लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। इन अनियमितताओं के सामने आने के बाद शहर में व्यापक नाराजगी फैल गई और शिकायतें शासन तक पहुंचीं।
अन्य कर्मचारी-अधिकारी पर भी कार्रवाई संभव
मीडिया रिपोर्टों और बढ़ती शिकायतों के दबाव के बाद, नगर पालिका ने 14 अक्टूबर 2025 को होने वाली पूरी नीलामी को पहले ही रद्द करने का आदेश जारी कर दिया था।
सीएमओ के निलंबन से संकेत मिलता है कि इस मामले में आगे और भी कार्रवाई हो सकती है। विभागीय जांच जारी रहेगी, जिससे यह स्पष्ट होगा कि इन अनियमितताओं में अन्य कौन-कौन से अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे।