
नियमों के अनुसार, रेत खनन सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक केवल मैनुअल तरीके से किया जाना चाहिए, जिसमें ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का उपयोग सीमित होता है।
हालांकि, कुरूद घाट पर स्थिति बिल्कुल विपरीत है। यहां एक साथ 3 से 4 शक्तिशाली चेन माउंटेन मशीनें दिन-रात अवैध रूप से रेत निकाल रही हैं।
इन मशीनों से निकाली गई रेत को बड़ी हाइवा ट्रकों में ओवरलोड करके ले जाया जा रहा है। सैकड़ों की संख्या में बिना रॉयल्टी पर्ची वाले वाहन रोजाना बलौदाबाजार, रायपुर, मुंगेली, बिलासपुर, बेमेतरा और महासमुंद जैसे आसपास के जिलों में रेत पहुंचा रहे हैं। खनन को खुला संरक्षण मिलने का आरोप
चिखली घाट पर मीडिया में खबर आने के बाद एक मशीन को सील किया गया था, लेकिन माफिया उसे दोबारा चालू करने की कोशिश में लगे हैं।
कुरूद घाट पर स्थिति अधिक गंभीर है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का आरोप है कि विभागीय अधिकारी इस घाट से मात्र 500 मीटर पहले ही लौट जाते हैं।
इस कथित मिलीभगत के कारण अवैध खनन को खुला संरक्षण मिल रहा है और कुरूद घाट पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।