
पार्टी सूत्रों का कहना है कि, जिलाध्यक्षों की ट्रेनिंग और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने को लेकर भी रूपरेखा तय की जा सकती है। कांग्रेस के लिए यह दौरा अहम माना जा रहा है, क्योंकि मनरेगा को लेकर पार्टी ने प्रदेशभर में आंदोलन छेड़ रखा है। 26 नवंबर को हुआ था पिछला दौरा
इससे पहले, कांग्रेस के छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट 26 नवंबर को दो दिन के दौरे पर छत्तीसगढ़ आए थे। उस दौरान उन्होंने प्रदेशभर में चल रहे SIR अभियान की समीक्षा की थी और संविधान बचाओ दिवस से जुड़े प्रमुख कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था। पायलट 26 नवंबर को रायपुर पहुंचे थे और वहां से सीधे धमतरी के लिए रवाना हुए थे।
धमतरी में उन्होंने संविधान बचाओ दिवस के कार्यक्रम में भाग लिया। इसके बाद SIR अभियान को लेकर समीक्षा बैठक की थी। धमतरी के कार्यक्रमों के बाद वे कांकेर पहुंचे, जहां पार्टी पदाधिकारियों के साथ संगठनात्मक समीक्षा बैठक हुई थी। कांकेर से सचिन पायलट देर शाम जगदलपुर पहुंचे थे।
अगले दिन यानी 27 नवंबर को उन्होंने वहां SIR अभियान की विस्तृत समीक्षा की और मीडिया से भी बातचीत की थी। इसके बाद वे शाम को दिल्ली के लिए रवाना हो गए थे। छत्तीसगढ़ में संगठन को मजबूत करने और पार्टी की तैयारियों का आकलन करने के लिहाज से सचिन पायलट का यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना गया था। अब 7 जनवरी का दौरा भी कांग्रेस की आगामी रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है