
CBI की लोअर कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को मार्च 2025 में आरोपों से बरी कर दिया था। CBI की विशेष कोर्ट ने सभी धाराएं हटाते हुए कहा था कि, उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का कोई आधार नहीं है। इस फैसले के खिलाफ सीबीआई ने सेशन कोर्ट में रिव्यू याचिका दाखिल की थी।
इसके पहले भूपेश बघेल के बचाव में जबलपुर हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त ने कोर्ट में दलीलें रखीं थीं। अधिवक्ता मनीष दत्त ने कहा था कि बघेल को झूठे मामले में फंसाया गया। भूपेश ने न तो सीडी बनवाई और न ही सीडी बांटी। उन्होंने किसी तरह का कोई ऑफेंस (अपराध) नहीं किया।
मुरारका-विनोद वर्मा का आवेदन खारिज
वहीं कारोबारी कैलाश मुरारका और पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकार विनोद वर्मा ने भी खुद को आरोपों से मुक्त करने के लिए आवेदन लगाया था। हालांकि सेशन कोर्ट ने उनके आवेदन को खारिज कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और उन्हें ट्रायल का सामना करना होगा।
इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के अलावा कारोबारी कैलाश मुरारका, पूर्व सीएम के सलाहकार विनोद वर्मा, विजय भाटिया और विजय पांड्या आरोपी हैं। मामले के एक अन्य आरोपी रिंकू खनूजा ने केस सामने आने के बाद आत्महत्या कर ली थी।
छत्तीसगढ़ की राजनीति का टर्निंग पॉइंट बना था कांड
सितंबर 2018 में, तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल और विनोद वर्मा को एक CD स्कैंडल के सिलसिले में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इससे राज्य की राजनीति में हलचल मच गई थी, क्योंकि विधानसभा चुनाव सिर्फ तीन महीने दूर थे।
भूपेश बघेल ने जमानत लेने से इनकार कर दिया था। यह उनके राजनीतिक करियर में एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बीजेपी के खिलाफ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया, जो पिछले 15 सालों से लगातार चुनाव जीत रही थी।
हर पोस्टर पर यह नारा लिखा था कि मैं भी भूपेश हूं। पूरे राज्य के गांवों और शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। कुछ दिनों बाद, भूपेश जेल से रिहा हो गए। इसके बाद, कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा चुनावों में शानदार जीत हासिल की और 68 सीटें जीतीं।
कहा जाता है कि भूपेश बघेल के नेतृत्व में, कांग्रेस बीजेपी विरोधी माहौल बनाने में सफल रही। CD स्कैंडल में भूपेश के खिलाफ की गई कार्रवाई को राज्य की राजनीति में एक टर्निंग पॉइंट माना जाता है।