
डडसेना के अनुसार, उन्होंने सौदे के तहत अलग-अलग तारीखों में RTGS के माध्यम से पूरी राशि आरोपियों के खातों में ट्रांसफर कर दी थी। इसमें गणेश्वर सिन्हा के खाते में 5 लाख रुपए और नीलमनी व खेमीन सिन्हा के खातों में 3-3 लाख रुपए जमा किए गए। पूरी राशि मिलने के बावजूद आरोपियों ने जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी नहीं की।
परिवादी ने बताया कि, 25 अगस्त को सभी आरोपी दुर्ग रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचे थे और दस्तावेज भी तैयार कर लिए गए थे। हालांकि, उस दिन सर्वर डाउन होने का हवाला देकर रजिस्ट्री नहीं हो पाई। इसके बाद 29 अगस्त को पाटन रजिस्ट्री कार्यालय में दोबारा आने का आश्वासन दिया गया। लेकिन उस दिन सभी आरोपी उपस्थित नहीं हुए, जिस कारण रजिस्ट्री फिर टल गई।इस घटना के बाद परिवादी लगातार आरोपियों से संपर्क कर रजिस्ट्री कराने की मांग करते रहे। हालांकि, आरोपियों ने हर बार अलग-अलग बहाने बनाकर प्रक्रिया को टाल दिया। इसके बाद परिवादी ने कोर्ट का रुख किया, जिसके बाद अब यह कार्रवाई हुई है। नोटिस दिया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया
हताश होकर परिवादी ने 18 सितंबर 2025 को विधिक नोटिस भेजा, लेकिन इसके बावजूद भी आरोपियों ने कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया। आरोप है कि आरोपियों ने जानबूझकर रजिस्ट्री से बचने की रणनीति अपनाई, जिससे साफ तौर पर धोखाधड़ी की मंशा सामने आती है।
पुलिस से लेकर एसपी तक शिकायत, नहीं हुई कार्रवाई
परिवादी ने 5 मार्च 2026 को रानीतराई थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई, लेकिन वहां कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 9 मार्च को पुलिस अधीक्षक दुर्ग से भी शिकायत की गई, लेकिन फिर भी मामला आगे नहीं बढ़ा। न्याय नहीं मिलने पर पीड़ित ने कोर्ट में परिवाद दायर किया, जिसके बाद यह मामला दर्ज हो सका।
कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई FIR
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पाटन ने परिवाद को स्वीकार किया और रानीतराई पुलिस को आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए। सभी आरोपी एक ही परिवार से जुड़े बताए जा रहे हैं और जमीन के संयुक्त मालिक थे।