
जानकारी के मुताबिक, ये मामला गीदम रेंज के गुमलनार इलाके का है। वन विभाग की टीम को तेंदुए का शिकार और खाल बेचने वाले हैं इसकी जानकारी मिली थी। जिसके बाद DFO रंगनाधा रामाकृष्णा वाय के निर्देश पर बचेली रेंजर डॉ प्रीतेश पांडेय के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई थी। इस टीम ने शिकारियों को पकड़ने जाल बिछाया। ग्राहक बनी थी फॉरेस्ट की टीम
अधिकारी-कर्मचारी खुद ग्राहक बने। वहीं खाल का सौदा करने पहुंचे शिकारियों को पकड़ लिया। इन्होंने अपना नाम सुंदरलाल, धरमू सिमरथ, दियालू, दिनेश कश्यप और गोबरु बताया। जिसके बाद वन विभाग की टीम ने इनके पास से तेंदुए की खाल बरामद की है। तेंदुए की उम्र करीब 6 से 7 साल थी। अब जानिए कैसे किया शिकार
गर्मी के मौसम में वन्य जीव पानी की तलाश में नदी किनारे आते हैं। शिकारियों को ये अंदेशा था कि यहां तेंदुए की दस्तक जरूर होगी। जिसके बाद उन्होंने नदी किनारे फंदा लगाकर रखा था। वहीं कुछ दिन पहले तेंदुआ फंदे में फंस गया। वो जिंदा था। फिर शिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने तेंदुए के सिर पर कुल्हाड़ी से वार किया और उसे मार दिए। जिसके बाद खाल निकाल ली। वन्यजीव अनमोल हैं, किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा
रेंजर डॉ प्रीतेश पांडे ने कहा कि वन्यजीवों का शिकार गंभीर अपराध है और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि तेंदुए जैसे जीव अनमोल हैं और पारिस्थितिकी संतुलन के लिए बेहद जरूरी हैं।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई
आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस कानून के तहत तेंदुए जैसे संरक्षित जीवों के शिकार पर सख्त सजा और जुर्माने का प्रावधान है।