युमेन्द्र कश्यप/न्यूज डेस्क। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ से जुड़ी उनकी ऐतिहासिक यात्रा की यादें एक बार फिर ताजा हो जाती हैं। महात्मा गांधी ने छत्तीसगढ़ का दौरा दो बार—दिसंबर 1920 और नवंबर 1933 में किया था।
गांधीजी का दूसरा छत्तीसगढ़ प्रवास 22 से 28 नवंबर 1933 तक रहा। 22 नवंबर को वे दुर्ग पहुंचे, जहां उन्होंने सार्वजनिक सभा को संबोधित करने के साथ विभिन्न संस्थानों और हरिजन बस्तियों का दौरा किया। इसके बाद वे उसी रात रायपुर पहुंचे। इस ऐतिहासिक यात्रा की दुर्ग, 22 नवंबर 1933 की तस्वीर का श्रेय राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय, नई दिल्ली को दिया गया है।
रायपुर प्रवास के दौरान गांधीजी ने हरिजन बस्तियों, खादी केंद्र और अन्य स्थानों का दौरा किया। उन्होंने स्वदेशी प्रदर्शनी का उद्घाटन किया तथा हरिजन कल्याण के लिए लोगों से सहयोग और योगदान का आह्वान किया। सरकारी डिजिटल जिला रिपॉजिटरी के अनुसार, रायपुर में उन्होंने विभिन्न सभाओं में भाग लिया और 28 नवंबर तक यहां ठहरे।
इस यात्रा के दौरान गांधीजी धमतरी, राजिम, बलौदाबाजार, भाटापारा और बिलासपुर सहित कई स्थानों पर पहुंचे। धमतरी में उन्होंने सार्वजनिक और महिला सभा को संबोधित किया तथा हरिजन बस्ती का दौरा किया। उन्होंने सामाजिक भेदभाव और छुआछूत समाप्त करने का संदेश भी दिया।
दुर्ग में गांधीजी के स्वागत और उनके कार्यक्रमों से जुड़ा एक ऐतिहासिक दस्तावेज भी सामने आया है। इसमें उल्लेख है कि 22 नवंबर 1933 को दुर्ग पहुंचने के बाद उन्होंने आर्य समाज कन्या शाला, हरिजन बस्तियों और अन्य स्थानों का दौरा किया तथा मोती तालाब में आयोजित विशाल सभा को संबोधित किया।
गांधीजी का यह छत्तीसगढ़ प्रवास केवल एक राजनीतिक यात्रा नहीं था, बल्कि सामाजिक समानता, हरिजन कल्याण, स्वदेशी और जनजागरण से जुड़ा महत्वपूर्ण अध्याय भी रहा। उनकी जयंती पर छत्तीसगढ़ की धरती से जुड़ी यह ऐतिहासिक यात्रा आज भी प्रदेश के इतिहास की महत्वपूर्ण स्मृति के रूप में दर्ज है।