बंदूकों के साये से निकलकर रोजगार की राह पर युवा, भविष्य संवारने में जुटी सीआरपीएफ

Chhattisgarh Crimes Chhattisgarh Crimes Chhattisgarh Crimes Chhattisgarh Crimesयुमेन्द्र कश्यप/मैनपुर। कभी नक्सली गतिविधियों के चलते चर्चा में रहने वाले मैनपुर क्षेत्र में अब युवाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता की राह दिखाने की कोशिश की जा रही है। जंगलों में शांति का माहौल मजबूत होने के साथ ही स्थानीय नौजवानों को बेहतर भविष्य से जोड़ने की पहल भी आगे बढ़ रही है। इसी दिशा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 211वीं बटालियन ने युवक-युवतियों को पुलिस भर्ती के लिए तैयार करने और उन्हें रोजगारमूलक प्रशिक्षण देने की योजना बनाई है।

इस पहल के तहत युवाओं को एक ओर पुलिस भर्ती के लिए शारीरिक अभ्यास और लिखित परीक्षा की तैयारी कराई जा रही है, वहीं दूसरी ओर उन्हें स्वरोजगार के लिए उपयोगी हुनर सिखाने की तैयारी भी है। उद्देश्य स्पष्ट है कि क्षेत्र के युवाओं को नौकरी की तैयारी के लिए बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े और वे अपने आसपास ही सीखने तथा आगे बढ़ने के अवसर हासिल कर सकें।

सुबह मैदान में पसीना, फिर कक्षा में पढ़ाई

पुलिस भर्ती में सफलता हासिल करने के लिए अभ्यर्थियों को शारीरिक दक्षता के साथ लिखित परीक्षा की तैयारी भी जरूरी होती है। इसे ध्यान में रखते हुए सीआरपीएफ के जवान जुगाड़ कैंप और इंदागांव क्षेत्र में युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं।

प्रशिक्षण की शुरुआत सुबह 8 बजे होती है। शुरुआती दो घंटे शारीरिक अभ्यास के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसके बाद नाश्ते और विश्राम का समय मिलता है। फिर कक्षा में लिखित परीक्षा की तैयारी कराई जाती है। इस तरह अभ्यर्थियों को शारीरिक क्षमता बढ़ाने के साथ पढ़ाई और अनुशासन पर भी ध्यान देने का अवसर मिल रहा है।

दूरस्थ गांवों के उन युवाओं के लिए यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है, जिन्हें पुलिस भर्ती की तैयारी के लिए दूसरे शहरों में जाकर कोचिंग लेने में समय और आर्थिक संसाधन खर्च करने पड़ते हैं।

प्रशिक्षण में युवाओं की भागीदारी, महिला अभ्यर्थी भी मैदान में

जुगाड़ कैंप में अब तक करीब 26 अभ्यर्थियों के प्रशिक्षण में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। वहीं इंदा गांव में भी युवक-युवतियां पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इंदा गांव में 16 युवक नियमित रूप से अभ्यास कर रहे हैं। महिला अभ्यर्थी सरस्वती कश्यप भी इस प्रशिक्षण का हिस्सा हैं।

स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण की सुविधा मिलने से अभ्यर्थियों को नियमित अभ्यास और मार्गदर्शन का अवसर मिल रहा है। युवाओं को उम्मीद है कि लगातार मेहनत, बेहतर तैयारी और अनुशासित दिनचर्या से वे भर्ती प्रक्रिया में अच्छा प्रदर्शन कर सकेंगे।

एक महीने की तैयारी, पांच से छह अभ्यर्थियों के चयन की उम्मीद

प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहायक कमांडेंट निरंजन कुमार और चिरंजीव कुमार के मार्गदर्शन में जवान अभ्यर्थियों को तैयार कर रहे हैं। जुगाड़ कैंप में सब-इंस्पेक्टर रणजीत सिंह और संजय कुमार पांडेय के साथ अभिलाष लम्बा भी शारीरिक अभ्यास और लिखित परीक्षा की तैयारी में सहयोग कर रहे हैं।

प्रशिक्षण से जुड़े अधिकारियों को उम्मीद है कि नियमित अभ्यास और मेहनत के दम पर पांच से छह अभ्यर्थी पुलिस भर्ती प्रक्रिया में सफलता हासिल कर सकते हैं। हालांकि, अंतिम चयन संबंधित भर्ती के नियमों, पात्रता और निर्धारित मानकों के आधार पर ही होगा।

कंपनी कमांडर चिरंजीव कुमार और निरंजन कुमार ने क्षेत्र के इच्छुक युवक-युवतियों से इस पहल का लाभ उठाने की अपील की है। अभ्यर्थी जुगाड़ कैंप पहुंचकर प्रशिक्षण से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

सरकारी नौकरी नहीं मिली तो भी हुनर बनेगा सहारा

सीआरपीएफ की इस पहल का दायरा केवल पुलिस भर्ती की तैयारी तक सीमित नहीं है। युवाओं को स्वरोजगार के विकल्प उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मछली पालन, मुर्गी पालन, सिलाई, मधुमक्खी पालन और कंप्यूटर शिक्षा जैसे प्रशिक्षण शुरू करने की योजना भी बनाई गई है।

इन प्रशिक्षणों के जरिए युवाओं को ऐसे काम सीखने का अवसर देने की तैयारी है, जिनके सहारे वे भविष्य में अपना व्यवसाय शुरू कर सकें। इससे उन युवाओं को भी लाभ मिल सकता है, जो सरकारी नौकरी में चयनित नहीं हो पाते, लेकिन अपने पैरों पर खड़ा होना चाहते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में मछली पालन, मुर्गी पालन और छोटे व्यवसाय आजीविका के बेहतर साधन बन सकते हैं। हालांकि, इन योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब प्रशिक्षण के साथ जरूरी संसाधन, तकनीकी मार्गदर्शन और उत्पादों को बेचने के लिए बाजार तक पहुंच भी उपलब्ध हो।

शांति के बाद विकास की चुनौती, युवाओं को अवसर देना जरूरी

मैनपुर जैसे दूरस्थ इलाके में स्थायी शांति और विकास के लिए सुरक्षा व्यवस्था के साथ शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसर भी महत्वपूर्ण हैं। स्थानीय युवाओं को आगे बढ़ने के रास्ते मिलते हैं, तो इसका लाभ उनके परिवारों के साथ पूरे क्षेत्र को मिल सकता है।

सीआरपीएफ की 211वीं बटालियन की यह पहल इसी दिशा में एक प्रयास है। एक ओर पुलिस भर्ती के लिए युवाओं को तैयार किया जा रहा है, तो दूसरी ओर उन्हें वैकल्पिक रोजगार से जोड़ने की योजना बनाई गई है।

अब इस पहल के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रशिक्षण को नियमित रूप से संचालित करने, अधिक युवाओं को जोड़ने और प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों को रोजगार अथवा स्वरोजगार के अवसरों तक पहुंचाने की होगी।

जंगलों में शांति के बीच यदि स्थानीय युवाओं को हुनर, रोजगार और आगे बढ़ने का अवसर मिलता है, तो यह बदलाव केवल कुछ युवाओं की जिंदगी नहीं बदलेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास को नई दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।