
उन्होंने कहा कि जनजातीय आस्था स्थलों के संरक्षण एवं विकास हेतु देवगुड़ी के साथ सरना स्थलों को भी शामिल करने की व्यवस्था की जाए। शिक्षा में सुधार हेतु आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षक विहीन और एकल शिक्षक स्कूलों की समस्या को शीघ्रता से हल किया जाए।
बैठक में जनजातीय समुदाय की आर्थिक सशक्तिकरण योजनाओं पर प्रभावी अमल किया जाए, जिससे उनकी प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हो। जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण, शिक्षा, सामाजिक-आर्थिक उन्नयन, प्रशासनिक सुधार और संस्कृति संरक्षण से जुड़े अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में परिषद के उपाध्यक्ष रामविचार नेताम, मंत्री, विधायक, अधिकारी शामिल हुए। मंत्री नेताम ने परिषद द्वारा लिए गए निर्णयों को नीति-निर्माण में प्रभावी रूप से शामिल करने का आश्वासन दिया।
शिक्षा, आजीविका के सुधार को लेकर भी आए सुझाव
बैठक में सदस्यों ने जनजातीय समुदाय की शिक्षा, आजीविका, सामाजिक-आर्थिक विकास और प्रशासनिक सुधार को लेकर ठोस सुझाव दिए। साय ने सभी प्रस्तावों के क्रियान्वयन के निर्देश दिए कि नीतिगत सुधारों का वास्तविक लाभ जनजातीय समुदाय तक पहुँचे। यह बैठक जनजातीय समाज के विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।
सदस्यों ने जनजातीय समुदाय के सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर सुझाव दिए। इनमें जनजातीय बालिकाओं के लिए छात्रावासों एवं सुविधाओं में वृद्धि, जनजातीय बहुल क्षेत्रों में रोजगार एवं भर्ती प्रक्रिया को प्रोत्साहित करना, स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर उपलब्धता एवं जनजातीय क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार, आदिवासियों की पारंपरिक आजीविका को सशक्त करने हेतु विशेष योजनाएं लागू करना, जनजातीय कला, संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए विशेष योजनाएं लागू करना शामिल है।