
पकड़े गए अधिकतर आरोपित हरियाणा, बिहार और झारखंड से आकर परीक्षा केंद्रों का दुरुपयोग कर रहे हैं। इसका नुकसान छत्तीसगढ़ के उन स्थानीय युवाओं को हो रहा है जो वर्षों से मेहनत कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जो मामले पकड़े गए, वे सामने आ गए, लेकिन इस तरह की गतिविधियां लगातार जारी रहने की आशंका है।
कैसे सॉफ्ट टारगेट बना छत्तीसगढ़
1. गेट परीक्षा: हरियाणा का ब्लूटूथ गैंग
रायपुर पुलिस ने गेट परीक्षा में नकल करा रहे छह लोगों को गिरफ्तार किया। ये हरियाणा के झज्जर, हिसार और फतेहाबाद के रहने वाले थे। इन्होंने परीक्षार्थियों के जूतों में ब्लूटूथ डिवाइस छिपाकर नकल की साजिश रची थी। गिरोह इतना शातिर था कि 10वीं पास युवक बाहर बैठकर बीटेक छात्रों को पास कराने की कोशिश कर रहा था।
2. एसएससी परीक्षा में झारखंड का मुन्नाभाई
कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की जीडी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में रायपुर के एक केंद्र पर बायोमेट्रिक जांच के दौरान असली अभ्यर्थी की जगह झारखंड से आया युवक परीक्षा देता पकड़ा गया। उंगलियों के निशान और फोटो का मिलान न होने पर उसे गिरफ्तार किया गया।
3. ईएसआइसी एमटीएस मेंस में फर्जी अभ्यर्थी
राज्य कर्मचारी बीमा निगम (ईएसआइसी) की मल्टी-टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) मुख्य परीक्षा में सरोना स्थित एक डिजिटल जोन में एक युवक दूसरे अभ्यर्थी के नाम पर परीक्षा देने पहुंचा था। आधार कार्ड और प्रवेश पत्र की जांच के दौरान शक होने पर पूछताछ में उसने पैसे लेकर परीक्षा देने की बात स्वीकार की।
4. चपरासी भर्ती में भी नकल
रायपुर में चपरासी भर्ती परीक्षा के दौरान भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के माध्यम से नकल का मामला सामने आया था। पुलिस ने आरोपित को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह दर्शाता है कि गिरोह हर स्तर की परीक्षा में सक्रिय है।
5. बीएसएफ फर्जी नियुक्ति पत्र घोटाला
ग्वालियर और रायपुर के बीच बीएसएफ भर्ती को लेकर फर्जी नियुक्ति पत्र का मामला भी सामने आया था। गिरोह ने बेरोजगार युवकों को नकली नियुक्ति पत्र थमा दिए। नियुक्ति के लिए पहुंचने पर युवाओं को ठगी का पता चला। इसमें भी अंतरराज्यीय गिरोह की भूमिका संदिग्ध पाई गई।